दिन के कारोबार के लिए एक परिचय

ब्रोकर टेस्ट

ब्रोकर टेस्ट
रिपोर्टर : लाइसेंस बनवाना है, कहां बनेगा।

Viral Video MP: रतलाम के जावरा में मोबाइल फोन की बैटरी में ब्लास्ट, बड़ा हादसा टला

SEBI के रडार पर इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज के 4 ब्रोकर, स्पेशल ऑडिट के आदेश, जानें क्या हा पूरा मामला

कमोडिटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स (commodity derivatives contracts) में कथित अनियमितताओं को लेकर इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज लिमिटेड (ICEX) के 4 ब्रोकर यानी ब्रोकरेज फर्म्स मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के रडार पर हैं। SEBI इस मामले में स्पेशल ऑडिट के आदेश दे दिए हैं। Moneycontrol को इस मामले से जुड़े 2 सूत्रों ने बताया कि SEBI ब्रोकर टेस्ट ने ICEX के जिन 4 ब्रोकरेज फर्म्स का स्पेशल ऑडिट कराने का आदेश दिया है, उनमें गोगिया कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड (Gogia Capital Services limited), एमएसबी ई-ट्रेड सिक्योरिटीज (MSB e-trade Securities) मौजमपुरिया सिक्योरिटीज ब्रोकिंग (Mauzampuria Securities Broking) और फाइंडॉक कमोडिटीज (Findoc Commodities) शामिल हैं।

इन चारों ब्रोकिंग फर्म्स पर पेमेंट में गड़बड़ी करने का आरोप है। सूत्रों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि ICEX के मैनेजमेंट ने इन चारों फर्म्स को लिक्विडिटी एन्हान्समेंट स्कीम (Liquidity Enhancement Scheme- LES) ब्रोकर टेस्ट के तहत स्टील, डायमंड, इसबगोल, रबर, मिर्च और PB1121 के लिए पैसे दिए। SEBI अब इस मामसे में पैसे के ट्रेल की जांच कर रही है कि ये फंड कहां खर्च हुए। SEBI इन इस बात की जांच के लिए स्पेशल ऑडिट के आदेश दिए हैं कि कहीं ये पैसे वापस ICEX में तो ट्रेडिंग के लिए नहीं लगाए गए।

Karvy scam: कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर ED की बड़ी कार्रवाई, इतने करोड़ की संपत्ति और जब्त की

Alok Kumar

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Published on: July 30, 2022 16:30 IST

Karvy scam- India TV Hindi

Photo:FILE Karvy scam

Highlights

  • ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में 110 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है
  • नए अटैचमेंट के साथ, अब कुल 2,095 करोड़ रुपये हो गए
  • मार्च ब्रोकर टेस्ट में, ईडी ने 1,984 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी

Karvy scam: ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने शनिवार को कहा कि उन्होंने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (केएसबीएल), इसके अध्यक्ष कोमांदूर पार्थसारथी और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में 110 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्ति कुर्क की है। नए अटैचमेंट के साथ, अब कुल 2,095 करोड़ रुपये हो गए हैं। मार्च में, ईडी ने 1,984 करोड़ रुपये की अचल और चल संपत्ति भूमि, भवन और शेयर होल्डिंग के रूप में कुर्क की थी। जांच एजेंसी ने सीसीएस पुलिस स्टेशन, हैदराबाद पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की, लोन देने वाले बैंकों की शिकायतों पर, जिन्होंने शिकायत की थी कि कार्वी समूह ने लगभग 2,800 करोड़ रुपये के अपने ग्राहकों के शेयरों को अवैध रूप से गिरवी रखकर बड़ी मात्रा में ऋण लिया था और एनएसई ब्रोकर टेस्ट और सेबी के आदेशों के अनुसार ग्राहक की प्रतिभूतियों के जारी होने के बाद उक्त ऋण एनपीए बन गया।

अग्रणी स्टॉक ब्रोकरों में से एक था

केएसबीएल लाखों ग्राहकों के साथ देश के अग्रणी स्टॉक ब्रोकरों में से एक था। 2019 में एनएसई द्वारा किए गए केएसबीएल के सीमित उद्देश्य के निरीक्षण के बाद यह घोटाला सामने आया था कि केएसबीएल ने डीपी खाते का खुलासा नहीं किया था और ग्राहक प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर जुटाई गई धनराशि को स्टॉक ब्रोकर-क्लाइंट खाते के बजाय अपने स्वयं के छह बैंक खातों (स्टॉक ब्रोकर-स्वयं खाते) में जमा किया। ईडी ने एनएसई द्वारा किए गए ऑडिट और केएसबीएल के खिलाफ ब्रोकर टेस्ट सेबी और आरओसी द्वारा पारित आदेश और बीडीओ इंडिया एलएलपी की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट एकत्र की। ईडी ने 2021 में नौ जगहों पर तलाशी ली थी। इस साल, पराथसारथी और जी. हरि कृष्ण, सीएफओ को गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एजेंसी ने कहा कि पूछताछ के दौरान आरोपी टालमटोल करते रहे।

ईडी की जांच के अनुसार, केएसबीएल ने अपने ग्राहकों द्वारा दिए गए पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया था और अवैध रूप से ऋण जुटाने के लिए इसका दुरुपयोग किया था। उन ग्राहकों के शेयर, जिन पर केएसबीएल का कोई धन बकाया नहीं था, उन्हें केएसबीएल के पूल खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था और स्वामित्व की भ्रामक घोषणा करके बैंकों के पास गिरवी रख दिए गए थे। ईडी के एक अधिकारी ने कहा, ग्राहक के खातों से शेयर ट्रांसफर किए गए थे, जिसके लिए केएसबीएल की बिक्री टीम ने दावा किया था कि उन्होंने फोन या मौखिक रूप से स्टॉक उधार के लिए ग्राहकों की मंजूरी ली थी, लेकिन कोई सहायक दस्तावेजी सबूत नहीं थे। अपराध की बड़ी मात्रा में अभियुक्तों द्वारा निवेश, अल्पकालिक अग्रिम, समूह की कंपनियों को ऋण के रूप में निवेश किया गया था। इसके परिणामस्वरूप केएसबीएल की सहायक कंपनियों के मूल्य में वृद्धि हुई। ईडी ने कहा, अब आरोपी मुख्य आरोपी को अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त करने के लिए इन सहायक व्यवसायों को लाभ पर बेचने की कोशिश कर रहे थे।

जावरा का प्रॉपर्टी ब्रोकर और बड़ावदा का युवक पॉजिटिव

-महामारी की मार से कुछ राहत : रविवार को दो संक्रमित मिले, आंकड़ा बढ़कर 299 जा पहुंचा- जावरा। (नईदुनिया न्यूज)। जावरा अनुविभाग क्षेत्र में रविवार को दो कोरोना पॉजिटिव आए। इसमें नगर के सागर मोती परिसर निवासी प्रॉपर्टी ब्रोकर तथा ग्राम बड़ावदा के एक युवक की रिपोर्ट शामिल है। अब तक जावरा अनुविभाग में 299 कोरोना पॉजिटिव आ चुक

जावरा का प्रॉपर्टी ब्रोकर और बड़ावदा का युवक पॉजिटिव

-महामारी की मार से कुछ राहत : रविवार को दो संक्रमित मिले, आंकड़ा बढ़कर 299 जा पहुंचा-

जावरा। (नईदुनिया न्यूज)। जावरा अनुविभाग क्षेत्र में रविवार को दो कोरोना पॉजिटिव आए। इसमें नगर के सागर मोती परिसर निवासी प्रॉपर्टी ब्रोकर तथा ग्राम बड़ावदा के एक युवक की रिपोर्ट शामिल है। अब तक जावरा अनुविभाग में 299 कोरोना पॉजिटिव आ चुके ब्रोकर टेस्ट है।

सूरत : शहरवासियों के लिए खुशखबरी, आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में वेटिंग में आई कमी

सूरत आरटीओ में प्रतीक्षा करने के पीछे कारण यह था कि प्रतिदिन 150 चार पहिया और 250 दोपहिया सहित कुल 400 वाहनों का टेस्ट लिया जाता था। मान लीजिए कि वर्ष 2019 में यदि कोई व्यक्ति अप्रैल के महीने में स्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन करता है, तो उसका नंबर जून या जुलाई के महीने में आएगा।

पाल आरटीओ में ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का इंतजार अब लगभग शून्य हो गया है। जिसका अर्थ है कि अब अर्जी करने वाले वाहन चालकों को तुरंत दूसरे दिन ड्राइविंग टेस्ट के लिए नंबर आ जा रहा है। गौरतलब है कि लॉकडाउन से पहले पाल आरटीओ में ढाई से तीन महीने का वेटिंग पीरियड था। फिर लोग लर्निंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग कॉलेजों में जाने लगे। उसके बाद उन्हें दलालों की मध्यस्थता से नवसारी, बारडोली या आहवा से करा लेते थे।

कोरोना के बाद दलाली का रेट हुआ डबल

कोरोना के बाद दलाली का रेट हुआ डबल

कोरोना काल में कई धंधे बुरी तरह प्रभावित हुए, तो अनलॉक में कारोबारियों ने मुनाफे का अनुपात बढ़ा दिया। इसे देखते हुए दलाली का धंधे को जो धक्का लगा, उसकी भरपाई के लिए अब दलालों ने 'ऊपरी फीस' बढ़ा दी है। आलम यह है कि लाइसेंस बनवाने की दलाली का रेट रिवाइज होकर दोगुना हो चुका है। लॉकडाउन से पहले दलालों का रेट 3500 से 4000 रुपए था, लेकिन इन दिनों ये लोग 7000 से 8500 रुपए तक चार्ज कर रहे हैं। दलाल काम जल्दी कराने और बिना टेस्ट व बगैर किसी सरकारी झमेले में पडे़ लाइसेंस दिलवाने का दावा कर रहे हैं। आम नागरिक दलाल की बातों में पड़कर ज्यादा पैसे देने को तैयार हो जाते हैं।

हर व्यक्ति की जरुरत है डीएल

डीटीओ ऑफिस से सरोकार चाय बेचने वाले से कंपनी के मालिक तक और सरकारी एवं प्राइवेट संस्थान में काम करने वाले हर व्यक्ति का होता है। क्योंकि रोड पर गाड़ी चलाने के लिए हर नागरिक को लाइसेंस की आवश्यकता होती है। लेकिन लाइसेंस बनवाना आसान नहीं है। यहां के कर्मचारियों ने ही लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को जटिल कर रखा है। आम आदमी लाइसेंस बनवाने डीटीओ ऑफिस आता है। लेकिन वहां उसकी मुलाकात सरकारी कर्मचारी से नहीं, बल्कि ब्रोकर से होती है। इसके बाद शुरू होता झांसे में लेने का खेल। 'दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट' के पास लगातार ऐसी शिकायत पहुंच रही थी। जिसकी पड़ताल करने जब रिपोर्टर डीटीओ ऑफिस पहुंचा, तो उसकी भी मुलाकात ब्रोकर ब्रोकर टेस्ट से हुई। ब्रोकर ने लाइसेंस बनवाने के लिए 8500 रुपए देने को कहा। ब्रोकर ने कहा कि सभी चीज का रेट बढ़ गया है। अब 8500 रुपए लगेंगे। बहुत होगा तो 500 रुपए कम हो जाएगा, लेकिन इससे कम नहीं होगा।

रेटिंग: 4.31
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 208
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *