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क्रिप्टोकरेन्सी का सिद्धांत

क्रिप्टोकरेन्सी का सिद्धांत
समय के साथ-साथ विभिन्न चरणों में न्यूनतावादी जीवन शैली की गहराई तक जाया जा सकता है।

न्यूनतावादी जीवन शैली (Minimalist lifestyle) को एक मन की अवस्था कहा जा सकता है। यह कोई नियम नहीं है। वास्तव में इसका मतलब है कि आपके पास जो भी है जरूरत से ज्यादा है और आप कम से कम में खुश रहते हुए आनंद से अपना जीवन यापन कर सकते हैं।

कोई भी मिनिमलिस्ट कभी इस बात से चिंतित या दुखी नहीं होता कि उसके पास दुनिया में उपलब्ध भौतिक सुख या सुविधाएँ क्रिप्टोकरेन्सी का सिद्धांत नहीं है। जो है उसी में जीवन जीना सही मायनों में मिनिमलिस्ट जीवनशैली कही का सकती है।

न्यूनतावाद को कई बार नकारात्मक दृष्टि से भी देखा जाता है। लोग यह मानते हैं कि मिनिमलिस्ट होना मतलब चीज़ों का त्याग करना है और उन सभी सुख सुविधाओं का लाभ नहीं लेना जो आधुनिक युग में उपलब्ध है।

कौन होता है न्यूनतावादी?

एक न्यूनतावादी होने का मतलब है कि आप भौतिक चीजों से ज्यादा अपने आप को महत्व देते हैं। इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि एक मिनिमलिस्ट जीवनशैली जीने वाले व्यक्ति के लिए उसकी चाहत से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी आवश्यकताएं हैं। और वह इसी आधार पर किसी चीज़ या सेवा लेने का निर्णय करते हैं।

न्यूनतावादी जीवन शैली (Minimalist lifestyle) को एक मन की अवस्था कहा जा सकता है। यह कोई नियम नहीं है। वास्तव में इसका मतलब है कि आपके पास जो भी है जरूरत से ज्यादा है और आप कम से कम में खुश रहते हुए आनंद से अपना जीवन यापन कर सकते हैं।

कोई भी मिनिमलिस्ट कभी इस बात से चिंतित या दुखी नहीं होता कि उसके पास दुनिया में उपलब्ध भौतिक सुख या सुविधाएँ नहीं है। जो है उसी में जीवन जीना सही मायनों में मिनिमलिस्ट जीवनशैली कही का सकती है।

न्यूनतावाद को कई बार नकारात्मक दृष्टि से भी देखा जाता है। लोग यह मानते हैं कि मिनिमलिस्ट होना मतलब चीज़ों का त्याग करना है और उन सभी सुख सुविधाओं का लाभ नहीं लेना जो आधुनिक युग में उपलब्ध है।

कौन होता है न्यूनतावादी?

एक न्यूनतावादी होने का मतलब है कि आप भौतिक चीजों से ज्यादा अपने आप को महत्व देते हैं। इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि एक मिनिमलिस्ट जीवनशैली जीने वाले व्यक्ति क्रिप्टोकरेन्सी का सिद्धांत के लिए उसकी चाहत से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी आवश्यकताएं हैं। और वह इसी आधार पर किसी चीज़ या सेवा लेने का निर्णय करते हैं।

कैसे काम करती है गोल लाइन तकनीक

गोल लाइन तकनीक से सही निर्णय किये जाते है। जब भी फुटबॉल गोल लाइन को पार करता है तब उसे ट्रैक किया जाता है और उसका पता लग जाता है और रेफरी ने हात पर एक घडी पहनी हुई होती है जिसपर सिग्नल आ जाता है। उस सिग्नल्स से रेफरी अपना फैसला सुनाता है। रेफरी को सिग्नल्स बस कुछ सेकण्ड्स में मिल जाते है जिस कारन ये तकनीक कारगर मानी जाती है।
रेफरी के ऊपर बहोत सारे जिम्मेदारियां होती है। रेफरी ने अगर गलत फैसला सुना दिया तो दों देशों के सम्बन्ध बिगड़ सकते है। गलत फैसलों से प्रेक्षक आक्रोश करने लगते है जिस कारन हंगामा हो सकता है इसलिए ये बहोत महत्वपूर्ण है की सही निर्णय लिया जाये और गोल क्रिप्टोकरेन्सी का सिद्धांत लाइन तकनीक की सहायता से करना आसान हो जाता है।

इस तकनीक में दूसरी एडवांस टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाता है जिस कारन यह तकनीक थोड़ी महँगी होती है। सर्वसामान्य स्तर पर आयोजिय होने वाले सामानों में इस तकनीक का इस्तेमाल करना मुश्किल बन जाता है।

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