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हल्दी, जीरा और धनिया में इस प्रकार रहेगा रुझान?

जयपुर। बाजार में नए सीजन की हल्दी की मांग तेज हो रही है और इसी के चलते हल्दी वायदा अप्रैल में तेजी देखी गई। इसकी कीमतें 10310 से 10750 के दायरे में रहने की उम्मीद है। तेलंगाना की निजामाबाद मंडी में हल्दी की आवक शुरू हो गई है और यहां पर प्रतिदिन 150 से 200 बोरी (प्रति बोरी 65 किलो) की आवक हो रही है। गौरतलब है कि हल्दी के कम उत्पादन के अनुमान के चलते इसकी कीमतें वर्ष दर वर्ष 74% अधिक है। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 7 महीनों में हल्दी का निर्यात 23% घटकर 89850 टन हुआ है। लेकिन यह अभी भी 5 साल के औसत से अधिक है। जीरा के मार्च वायदा की कीमतों में 1% की तेजी दर्ज की गई और यह 4 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। अब इसकी कीमतों के ₹19000 के स्तर को छूने की पूरी संभावना बन रही है। वर्तमान में इसकी कीमतें वर्ष दर वर्ष 39% अधिक है। जीरा की भौतिक मांग बढ़ रही है जबकि इसके मुकाबले में बुवाई के आंकड़े कमजोर है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात में जीरा की बुवाई 10 जनवरी तक 3.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर हुई है जबकि गत वर्ष की समान अवधि में 4.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर इसकी बुआई हुई थी। राजस्थान में 5.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर जीरा की बुवाई हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से अक्टूबर के बीच जीरा का निर्यात 17% घटकर 1.5 लाख टन हुआ है जो कि गत वर्ष की समान अवधि में 1.82 लाख टन हुआ था। धनिया वायदा जनवरी की कीमतें 7 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। जल्द ही इसकी कीमतें ₹10600 कुछ होने की उम्मीद है। 10 जनवरी 2022 तक गुजरात में धनिया का रकबा 125444 हेक्टेयर दर्ज किया गया जो कि गत वर्ष की समान अवधि में 140400 हेक्टेयर था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से अक्टूबर के बीच धनिया का निर्यात 33000 टन से 12.7 फ़ीसदी घटकर 28800 दर्ज किया गया है। राजस्थान के प्रमुख धनिया उत्पादक इलाकों में खराब मौसम और ओलावृष्टि से फसल के प्रभावित होने के समाचार से भी धनिया की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। प्रमुख कमोडिटी विशेषज्ञ मुकेश भाटिया का मानना है कि वर्ष 2022 सभी मसाला कमोडिटीयों के लिए काफी अच्छा रहेगा और हर गिरावट में मसाला कमोडिटी में खरीद फायदे का सौदा रहेगा।

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3 सालों से जीरा की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही थी लेकिन 2021 के अंत में जाकर जीरा किसानों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है क्यों.

वर्ष 2021 में भी मेंथा ऑयल की चाल सुस्त ही बनी रही। वर्ष 2017 में मेंथा ऑयल 1900 रुपए का उच्च स्तर छुआ था और 2021 में यह घटकर ₹900 के रुझान प्रकार स्तर.

रामगंज मंडी। आवके धनिया की आज भी कल के समान रहकर 9000 बोरी के आसपास रही। बाजार आज शुरुआत में स्टेंड भावो पर खुले थे जो आज की नीलामी के.

जयपुर, 21 सितम्बर। राज्य विधानसभा ने बुधवार को राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2020 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। प्रारम्भ .

ध्यान दिए जाने वाले बिंदु - राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में धनिया की बुवाई पर रखनी चाहिए नजर। -घरेलू एवं निर्यात मांग पर निर्भर होगी तेजी। -कि.

किसानों ने देसी बीज को बिसराया, हाइब्रिड में बढ़ रहा रुझान

गुढ़ाचंद्रजी. काश्तकार कम लागत में अच्छी फसल लेने के लिए हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर रहे हैं। उत्पादन तो बढ़ रहा है लेकिन देसी फसलों जैसा स्वाद और फ्लेवर पीछे छूटता जा रहा है। हाइब्रिड बीजों से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर हो रहा है। कई प्रकार की शरीर में बीमारी होने लगी है।

Published: February 22, 2022 08:37:51 pm

गुढ़ाचंद्रजी. काश्तकार कम लागत में अच्छी फसल लेने के लिए हाइब्रिड बीजों का उपयोग कर रहे हैं। उत्पादन तो बढ़ रहा है लेकिन देसी फसलों जैसा स्वाद और फ्लेवर पीछे छूटता जा रहा है। हाइब्रिड बीजों से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर हो रहा है। कई प्रकार की शरीर में बीमारी होने लगी है।
करौली जिले में ८० प्रतिशत किसान अधिक उपज लेने की चक्कर में हाइब्रिड बीजों का अधिक उपयोग कर रहे हैं। इसके कारण प्रतिवर्ष किसानों को बीज बदलना पड़ रहा है। जबकि देसी फसलों में अच्छी बीज का संरक्षण कर बार-बार उपयोग में लिया जा सकता है। अधिक उपज देने की खातिर किसान नित नए प्रयोग कर रहे हैं। कम लागत में अधिक पैदावार लेने के लिए हाइब्रिड बीजों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। इसके कारण प्रतिवर्ष काश्तकारों को बीजों को बदलना पड़ता है। इसके कारण उनकी निर्भरता सरकार एवं कृषि की दुकानों पर बढ़ती जा रही है। हालांकि हाइब्रिड बीजों से पैदावार अधिक हो रही है लेकिन भूमि की उर्वरता शक्ति लगातार कम होती जा रही है। इस कारण भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच गई है। इसी प्रकार सिलसिला चलता रहा तो १ दिन फसल उपज देना छोड़ देगी। जबकि पहले काश्तकार अच्छे बीजों का संरक्षण कर उसका बार-बार उपयोग करते थे। लेकिन अब ऐसे काश्तकारों की संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। भगवान में यूरिया खाद के लिए जो मारामारी हो गई है ऐसी महामारी बीजों के लिए भी हो सकती है।

किसानों ने देसी बीज को बिसराया, हाइब्रिड में बढ़ रहा रुझान

इन फसलों में सर्वाधिक उपयोग
माड़ क्षेत्र में सरसों, बाजरा, मूंग और सब्जियों में हाइब्रिड रुझान प्रकार संकर बीज का उपयोग सर्वाधिक हो रहा है। गेंहू में भी कुछ किसान हाइब्रिड बीज का उपयोग करने लगे हैं। हाइब्रिड बीज से एक और मिट्टी की उर्वरता समाप्त होती है दूसरी ओर स्वास्थ्य के लिए नुकसान पहुंचाती है। हाइब्रिड बीज के उपयोग से शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां जन्म ले लेती है।

यह होता है हाइब्रिड
हाइब्रिडाईजेशन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों में निषेचन कराकर नया पादप अंकुरित कराया जाता है। उसी हाइब्रिड संकर किस्म कहा जाता है। कम लागत में अच्छी पैदावार होती है। इस कारण काश्तकारों में इसका रुझान लगातार बढ़ता जा रहा है।

यह होता है फायदा
उत्पादन अच्छा होने के साथ लागत कम आती है। दाने का आकार भी बड़ा होता है। बीज का दाना छोटा होता है। फ्लेवर भी अलग होता है।

रुझान बढ़ रहा है।
कृषि पर्यवेक्षक कैलाश चंद्रवाल का कहना है कि हाइब्रिड बीजों के उपयोग के कारण प्रतिवर्ष बीज बदलना पड़ता है। देसी बीजों का बार-बार उपयोग किया जा सकता है। लेकिन किसानों का हाइब्रिड बीजों की ओर रुझान बढ़ता जा रहा है।

'जहाज डूब रहा.. 2023 के रुझान आने शुरू', राजस्थान में प्रमुख सचिव Vs मंत्री, राज्यसभा चुनाव से पहले महाभारत

राजस्थान में सरकार के अंदर भी खेल चल रहा है। इस बार खेल मंत्री अशोक चांदना ने मोर्चा खोला है। उनकी भिड़ंत सीधे-सीधे प्रमुख सचिव कुलदीप रांका से हुई है। ट्वीट कर चांदना ने इस्तीफे की पेशकश की है। हालांकि अशोक गहलोत ने कहा कि उनके इस बयान को ज्यादा तूल नहीं देनी चाहिए। मगर बीजेपी नेताओं ने इसमें अपने लिए मौका ढूंढ लिया है।

इस बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने राज्य में प्रस्तावित ग्रामीण ओलंपिक का जिक्र किया। उन्होंने जयपुर में संवाददाताओं से कहा कि राज्य में ग्रामीण ओलंपिक होने हैं, जिनमें 30 लाख से अधिक लोग भाग लेंगे। इतना बड़ा भार उन (चांदना) पर है। हो सकता है कि वो किसी प्रकार के तनाव में आ गए हों और टिप्पणी कर दी। उसको ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। मेरी उनसे बातचीत नहीं हुई है। दबाव में काम करते लग रहे हैं, इतनी बड़ी जिम्मेवारी उन पर आ गई है, देख लेंगे।

राजस्थान में प्रमुख सचिव Vs मंत्री अशोक चांदना
बगावती तेवर दिखाने वाले विधायक और मंत्री प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से नाराज हैं। उनका कहना है कि भले ही वे सरकार में हैं लेकिन अधिकारी उनकी सुनते ही नहीं है। काम नहीं होने से जनता तो परेशान है ही, पार्टी के कार्यकर्ता भी नाराज हैं। नाराज कार्यकर्ताओं के चलते कांग्रेस का फिर से सत्ता में लौटने का सपना साकार होना मुश्किल है। इसी कड़ी में मंत्री अशोक चांदना ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा की मेरे सभी विभागों का चार्ज कुलदीप रांका को दे दिया जाए क्योंकि वही सभी विभागों के मंत्री हैं। अशोक चांदना के पास रुझान प्रकार युवा एवं खेल विभाग, कौशल विकास, डीआईपीआर, आपदा प्रबंधन और पॉलिसी प्लैनिंग विभाग है। मंत्री के आदेश के बावजूद इन विभागों में कामकाज नहीं होने से आहत चांदना ने मंत्री पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी।

ब्यूरोक्रेसी पर सवाल उठा रहे राजस्थान के विधायक
डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक और यूथ कांग्रेस के रुझान प्रकार प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोघरा ने भी 18 मई को विधायक पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। घोघरा के खिलाफ डूंगरपुर के सदर थाने में राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज हुआ था। स्थानीय तहसीलदार ने उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इससे आहत होकर कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया था।

मुख्यमंत्री के सलाहकार और निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने गृह विभाग के अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है। उनके विधानसभा क्षेत्र में हत्या के एक मामले में निर्दोष व्यक्ति को जेल भेजने का मामला पिछले दिनों उन्होंने सदन में उठाया था। सरकार ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। 3 महीने बीत जाने के बावजूद भी निर्दोष को जेल भेजने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज संयम लोढ़ा ने गृह विभाग के अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा। पिछले दिनों डेंगू विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी ने भी ब्यूरोक्रेसी पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सीधा मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कार्यकर्ता मजबूत नहीं होगा तो हम चुनाव नहीं जीत सकेंगे। अगर हम चुनाव नहीं जीतेंगे तो आप मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।

बीजेपी नेताओं ने अपने लिए ढूंढ लिया मौका
राजस्थान के कांग्रेस सरकार में मचे घमसान को लेकर बीजेपी नेताओं ने अपने लिया मौका ढूंढ लिया है। अशोक चांदना के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने तो यहां तक कह डाला है कि 'जहाज़ डूब रहा है… 2023 के रुझान आने शुरू।' दरअसल, उदयपुर के नव संकल्प चिंतन शिविर के बाद से कांग्रेस पार्टी में में घमासान मचा हुआ है। आपसी खींचतान की छोटी-मोटी बातें भी अब खुलकर सामने आने लगी है।

होम लाइटिंग डिज़ाइन के रुझान और विचार: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

सोच-समझकर चुनी गई लाइटिंग डिज़ाइन आपके घर की आभा और सुंदरता को बढ़ा सकती है। रोशनी आपके स्थान में आयाम जोड़ती हैं और विशिष्ट क्षेत्रों और सजावट सुविधाओं की ओर ध्यान आकर्षित करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, स्टाइलिश प्रकाश जुड़नार आपके घर में अतिरिक्त सजावटी तत्व बन सकते हैं। इन दिनों होम लाइटिंग डिज़ाइन विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। अपने घर के लिए एक विकल्प चुनने से पहले, सुनिश्चित करें कि आप विभिन्न प्रकार के प्रकाश डिजाइनों, नवीनतम प्रकाश प्रवृत्तियों और घर को रोशन करने के लिए रोशनी के साथ डिजाइन करने वाले स्थानों के बारे में जानते हैं। यहाँ एक गाइड है।

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एमपी का यह शहर बना निवेशकों की पहली पसंद, धड़ाधड़ शुरू कर रहे इंडस्ट्री

जबलपुर । जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में अब निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इस वित्तीय वर्ष की शुरूआत से अब तक 24 हेक्टेयर जमीन अलग-अलग प्रकार के उद्योगों के लिए आवंटित की गई है। इनमें 450 करोड़ का निवेश आएगा। बीते दो साल में इस अवधि में यह सबसे ज्यादा आवंटन है। औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित होने वाले ज्यादातर उद्योग फूड प्रोसेसिंग से जुडे़ हैं।

industry and business

निवेश के मामले में जबलपुर उद्यमियों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। उद्योगों के लिए जो सुविधाएं हैं, आमतौर पर वे दूसरी जगह कम मिलती हैं। यहां बिजली और पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। वहीं सस्ता श्रम और औद्योगिक शांति भी है। इसलिए पहले की तुलना में ज्यादा निवेशक यहां आए हैं। अभी औद्योगिक क्षेत्र उमरिया-डुंगरिया और मनेरी में बड़ा निवेश हो रहा है। स्थापित होने वाले सभी छोटे एवं बडे़ उद्योगों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

इन उद्यमियों की संख्या ज्यादा
खाद्य पदार्थ बनाने वाले उद्यमियों की संख्या ज्यादा है। इसमें राइस मिल, जूस, कोल्ड ड्रिंक जैसी इकाइयां स्थापित होंगी। इसी प्रकार खनिज, पाइप जैसी इकाइयों में भी लोगों को रोजगार मिलेगा। खास बात यह है कि बीते दो साल में निवेश की जो गति थी, उसमें बड़ा सुधार आया है। निवेशक औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंडों की बुकिंग कर रहे हैं। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र के बाहर भी निवेश बढ़ा है। उद्योगपति निजी जमीन खरीदकर उन जगहों पर अपनी इंडस्ट्री लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

उमरिया-डुंगरिया में ज्यादा
मध्यप्रदेश इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन के अंतर्गत उमरिया-डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्र में इस साल ज्यादा निवेश आया है। यहां 13 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 19 उद्यमियों ने निवेश किया है। इन उद्योगों में 271 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। वहीं 450 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा। मनेरी औद्योगिक क्षेत्र में 12 रुझान प्रकार उद्यमियों ने हाल में निवेश किया है। वे 11 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्योग लगा रहे हैं। इनमें 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। वहीं हरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में भी 25 हेक्टेयर से ज्यादा जगह पर एथनाॅल बनाने वाली कंपनियां निवेश कर रही हैं।

इन क्षेत्रों में नहीं जगह खाली
इधर शहर में िस्थत औद्योगिक क्षेत्रों में नए उद्योगों के लिए जगह नहीं है। वे पूरे भरे हुए हैं। अधारताल और रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में 450 से अधिक इंडस्ट्री स्थापित हैं, अब यहां जगह खाली नहीं है। इसलिए जितने नए निवेशक हैं, वे उमरिया-डुंगरिया, हरगढ़ और मनेरी औद्योगिक क्षेत्रों में जा रहे हैं।

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