एक मुद्रा कैरी ट्रेड की मूल बातें

इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज

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मनसुखभाई दाफ्दा गुजरात के सुखपुर गांव के अपने कॉटन के खेत में, फाइल फोटो | रूही तिवारी, दिप्रिंट

लगातार दूसरे दिन स्थिर रहा पेट्रोल का भाव, जानिए प्रमुख शहरों में कीमतें

देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में मंगलवार को पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर नरमी देखी जा रही है जिससे पेट्रोल और डीजल के भाव में राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है.

नई दिल्ली: पेट्रोल व डीजल के दाम में आज कोई बदलाव नहीं हुआ. एक दिन पहले तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में कटौती की थी. पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती का सिलसिला आज थम गया.

देश के छह प्रमुख महानगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में मंगलवार को पेट्रोल व डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर नरमी देखी जा रही है जिससे पेट्रोल और डीजल के भाव में राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है.

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कच्चे तेल की वैश्विक मांग कमजोर रहने के कारण कीमतों में फिर नरमी देखी इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज जा रही है. अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर सोमवार को बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के अक्टूबर वायदा अनुबंध में 0.09 फीसदी की कमजोरी के साथ 58.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था.

वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के सितंबर डिलीवरी अनुबंध में 0.20 फीसदी की कमजोरी के साथ 54.39 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था.

एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (एनर्जी व करेंसी रिसर्च) अनुज गुप्ता के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का साया पूरी दुनिया पर पड़ा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती का माहौल है. लिहाजा कच्चे तेल की खपत मांग कमजोर रहने से कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है.

ब्रेंट क्रूड का भाव अगस्त महीने में अब तक सात डॉलर प्रति बैरल घट चुका है. वहीं, इस साल सबसे ऊंचे भाव से तुलना करें तो पिछले करीब साढ़े तीन महीने में ब्रेंट क्रूड का दाम करीब 17 डॉलर प्रति बैरल घट गया है.

गौरतलब है कि 25 अप्रैल को आईसीई पर ब्रेंट क्रूड का भाव 75.60 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर आई नरमी

अमेरिका में कच्चे तेल के साप्ताहिक आंकड़े आने से पहले गुरुवार को अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में फिर कच्चे तेल के भाव में नरमी आई। इससे पहले बुधवार को प्रमुख विदेशी वायदा बाजारों में तेल के दाम में आठ फीसदी.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में फिर आई नरमी

अमेरिका में कच्चे तेल के साप्ताहिक आंकड़े आने से पहले गुरुवार को अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में फिर कच्चे तेल के भाव में नरमी आई। इससे पहले बुधवार को प्रमुख विदेशी वायदा बाजारों में तेल के दाम में आठ फीसदी से ज्यादा का उछाल आया, जिसके कारण भारतीय वायदा बाजार में अब तक कच्चे तेल के सौदों में तेजी एक फीसदी से ज्यादा की बढ़त बनी हुई है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के सबसे ज्यादा सक्रिय सौदों में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।

पूवार्ह्न 11.38 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल के जनवरी एक्सपायरी अनुबंध में पिछले सत्र के मुकाबले 38 रुपये यानी 1.18 फीसदी की बढ़त के साथ 3,252 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था।

वहीं, विदेशी वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज यानी आईसीई पर ब्रेंट क्रूड का मार्च डिलीवरी अनुबंध पिछले सत्र के मुकाबले 1.21 फीसदी की गिरावट के साथ 54.62 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। इससे पहले बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 55.58 डॉलर प्रति बैरल तक उछला और कारोबार के दौरान 9.35 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

वहीं, न्यूयार्क मकेर्ंटाइल एक्सचेंज यानी नायमैक्स पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई का फरवरी डिलीवरी सौदा 1.22 फीसदी की गिरावट के साथ 46.04 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ था। डब्ल्यूटीआई में बुधवार को 7.95 फीसदी की तेजी दर्ज की गई और कारोबार के दौरान भाव 46.99 डॉलर प्रति बैरल तक उछला।

एंजेल ब्रोकिंग हाउस के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अनुज गुप्ता ने कहा कि पिछले सत्र में कच्चे तेल के दाम में आई जोरदार तेजी अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में भारी कमी आने की संभावना की एक रिपोर्ट के कारण आई थी। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों के आंकड़े आने के पहले ही तेजी पर ब्रेक लग गया। उन्होंने कहा कि बीते सत्र की तेजी को ओपेक देशों द्वारा तेल के उत्पादन में और कटौती करने के लिए बैठक करने की रिपोर्ट और शेयर बाजारों आई जबरदस्त रिकवरी से भी सपोर्ट मिला।

आयात सस्ता होने से घरेलू बाजार में कॉटन की चमक छिनी

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मनसुखभाई दाफ्दा गुजरात के सुखपुर गांव के अपने कॉटन के खेत में, फाइल फोटो | रूही तिवारी, दिप्रिंट

नई दिल्लीः विदेशों से आयात सस्ता होने से इस साल घरेलू बाजार में सफेद सोना यानी रूई (कॉटन) की चमक पिछले साल जैसी नहीं रही है. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कॉटन का भाव जून के पहले सप्ताह में जहां 90 सेंट प्रति पौंड से ऊपर चल रहा था वहां इस समय 65 सेंट प्रति पौंड के स्तर पर आ गया है. विदेशों में कॉटन का भाव गिरने से दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश भारत में कॉटन का आयात बढ़ गया है और निर्यात में कमी आई है. विदेशी बाजार में कॉटन का भाव घटने से भारतीय बाजार में भी कॉटन का भाव ठंडा पड़ गया है.

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुक्रवार को कॉटन जून डिलीवरी अनुबंध पिछले सत्र के मुकाबले 320 रुपये यानी 1.48 फीसदी लुढ़ककर 21,280 रुपये प्रति गांठ (170 किलो) पर आ गया. पिछले साल सात जून को एमसीएक्स पर कॉटन का भाव 22,710 रुपये प्रति गांठ पर बंद हुआ था.

वहीं, अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर कॉटन का जुलाई डिलीवरी अनुबंध शुक्रवार को 4.18 फीसदी की गिरावट के साथ 65.72 सेंट प्रति पौंड पर कारोबार कर रहा था. पिछले साल सात जून को आईसीई पर कॉटन का भाव 94.08 सेंट प्रति पौंड पर बंद हुआ था.

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कॉटन के भाव में इस साल आई भारी गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार जंग है. अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कॉटन निर्यातक है जबकि चीन कॉटन का एक बड़ा आयात देश है. दुनिया में सबसे ज्यादा कॉटन की खपत चीन में होती है.

अमेरिका द्वारा पिछले महीने चीन से आयातित 200 अरब डॉलर की वस्तुओं पर आयात शुल्क पिछले महीने बढ़ाने के बाद फिर 300 अरब डॉलर मूल्य की चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क लगाने की धमकी दी गई है. पिछले दिनों चीन ने भी अमेरिका से आयातित 60 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया.

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कॉटन बाजार के जानकार मुंबई के गिरीश काबड़ा ने बताया कि विदेशों में कॉटन सस्ता होने से घरेलू कंपनियां कॉटन आयात में ज्यादा रुचि ले रही है. लिहाजा, सफेद सोने की चमक इस साल पिछले साल जैसी नहीं रही.

हाजिर बाजार में बेंचमार्क गुजरात कॉटन शंकर-6 (29 एमएम) का भाव शुक्रवार को 45,800-46,100 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) था.

उद्योग संगठन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इसी सप्ताह जारी अपने अनुमान में कहा कि चालू सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान भारत 31 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) रूई का आयात कर सकता है, जबकि पिछले साल देश में रूई का आयात तकरीबन 15 लाख गांठ हुआ था.

उद्योग संगठन ने सोमवार को जारी अपने मई महीने के अनुमान में कहा कि देश से रूई का निर्यात इस सीजन में 46 लाख गांठ हो सकता है, जबकि पिछले सीजन में भारत ने 69 लाख गांठ रूई का निर्यात किया था.

जल्द ही 100 रुपये के पार होगा पेट्रोल, जानें क्यों इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज बढ़ रहे हैं दाम

कच्चे तेल में जारी तेजी की वजह से जल्द ही भारतीय बाजार में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार जा सकती है। इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज डीजल की कीमत भी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने का अनुमान है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताया.

जल्द ही 100 रुपये के पार होगा पेट्रोल, जानें क्यों बढ़ रहे हैं दाम

कच्चे तेल में जारी तेजी की वजह से जल्द ही भारतीय बाजार में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार जा सकती है। डीजल की कीमत भी नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने का अनुमान है। ऊर्जा विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताया है।

एंजेल ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज एंड रिसर्च) अनुज गुप्ता ने हिन्दुस्तान को बताया कि ओपेक देशों द्वारा आपूर्ति घटाने और दुनियाभार में लॉकडाउन खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार चला गया है। कच्चे तेल के भाव में 1 जनवरी से अबतक 18 फीसदी का उछाल आ चुका है। एक महीने में ब्रेंट की क्रूड की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का अनुमान है। अप्रैल के अंत तक कच्चा तेल 75 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। गुप्ता के अनुसार, अगर कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के पर निकला तो भारतीय बाजार में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार निकल जाएगी। डीजल की कीमत भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी।

अप्रैल अनुबंध में उछाल आया

अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बेंचमार्क कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के अप्रैल डिलीवरी अनुबंध में मंगलवार को बीते सत्र से 0.58 फीसदी की तेजी के साथ 61.05 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज कर रहा था। न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट के मार्च अनुबंध में बीते सत्र से 0.81 फीसदी की तेजी के साथ 58.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा था।

10 माह में करीब 17 रुपये की बढ़ोतरी

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने हिन्दुस्तान को बताया कि इस साल जनवरी और फरवरी में महज 13 दिन ही पेट्रोल 03.59 रुपये महंगा हो गया है। बीते 10 महीने में ही पेट्रोल के दाम में करीब 17 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। पेट्रोल के साथ साथ डीजल की कीमत भी रिकार्ड बनाने की राह पर अग्रसर है। इस साल डीजल 03.61 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। पिछले 10 महीने में ही इसके दाम में 15 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है।

इस तरह कच्चे तेल में आया उछाल
महीना प्रति बैरल कीमत (डॉलर में)
मार्च, 2020 20.35

अप्रैल, 2020 18.61
मई, 2020 33.50

जून, 2020 39.40
जुलाई, 2020 40.23

अगस्त, 2020 42.90
सितंबर, 2020 39.80

अक्तूबर, 2020 35.46
नवंबर, 2020 45.35

दिसंबर, 2020 48.46
जनवरी, 2021 52.23

फरवरी, 2021 60.55
स्रोत: केडिया कमोडिटी

इन पांच कारणों से आई तेजी

1. आपेक और सहयोगी देशों द्वारा कच्चे तेल का उत्पादन घटाना

2. कोरोना के मामले घटने और सरकारों द्वारा प्रोत्साहन पैकेज से तेल की मांग में उछाल
3. अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडेन द्वारा अमेरिका में शेल द्वारा कच्चा तेल का उत्पादन घटाने का संकेत

4. अधिकांश मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में कमजोरी से भी कच्चे तेल को समर्थन
5. दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भी कच्चे तेल में तेजी जारी

दिल्ली में पेट्रोल 87 रुपये के पार

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मंगलवार को फिर इजाफा हुआ, जिसके चलते इन पेट्रोलियम उत्पादों के दाम नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 87.30 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 93.83 रुपये प्रति लीटर हो गई। इसी तरह दिल्ली में डीजल का भाव बढ़कर 77.48 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 84.36 रुपये प्रति लीटर हो गया।

घर का बजट बिगड़ेगा

बीते एक साल के दौरान और खास तौर पर कोविड काल में घर का अधिकांश सामान महंगा हुआ है। लोग सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए सब्सिडी करीब-करीब खत्म ही हो गई है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत घर का बजट बिगाड़ने और महंगाई बढ़ाने का काम करेगा।

जानें क्यों इस साल ‘सफेद सोना’ कपास किसानों के लिये फायदे का सौदा रहा!

एमएसपी से 15 प्रतिशत ज्यादा है कपास के भाव, चालू सीजन में 60 लाख गांठ से भी ज्यादा निर्यात के अनुमान

मुंबई, 4 मार्च (आईएएनएस)| सफेद सोना यानी कपास की खेती इस साल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई है। वैश्विक बाजार में रूई के दाम में आई तेजी के बाद देश में कपास का भाव इसके एमएसपी से 15 फीसदी से ज्यादा तेज हो गया है और किसान अब सरकारी एजेंसी की खरीद के मोहताज नहीं रह गए हैं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गणत्रा कहते हैं कि सफेद सोना वाकई इस साल किसानों के लिए सोना बन गया है।

सरकार ने कपास (लंबा रेशा) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5,825 रुपये प्रति क्विंटल और मध्यम रेशा वाली कपास का एमएसपी 55.15 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। कारोबारियों ने बताया कि गुजरात में कपास का भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज है। गणत्रा ने आईएएनएस को बताया कि बीते तीन साल के बाद रूई में इतनी बड़ी तेजी आई है, जिससे अगले सीजन में कपास की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी निस्संदेह बढ़ेगी और कपास की बुवाई के रकबे में पिछले साल के मुकाबले कम से कम 10 फीसदी का इजाफा होगा।

रूई का भाव अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बीते 25 फरवरी को 95.57 सेंट प्रति पौंड तक उछला था, जो 11 जून 2018 इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है, जब आईसीई पर रूई का भाव 96.49 सेंट प्रति पौंड तक चढ़ा था। हालांकि रूई का भाव इस साल के ऊंचे स्तर से टूटकर गुरुवार को 88 सेंट प्रति पौंड पर आ गया फिर भी रूई का भाव करीब तीन साल के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि रूई का भाव काफी ऊंचा हो गया था, जिसके बाद मुनाफावसूली हावी होने के कारण कपास के दाम में गिरावट आई है, हालांकि फंडामेंटल अभी भी मजबूत है।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के दाम में बीते एक सप्ताह के दौरान आई गिरावट के बाद भारतीय बाजार में में भी नरमी आई है। अतुल गणत्रा ने बताया कि जब वैश्विक बाजार में कॉटन 95 सेंट के ऊपर चला गया था, तब भारतीय कॉटन यानी रूई और अमेरिका के कॉटन के दाम में 14 सेंट का अंतर था जो अब घटकर सात सेंट रह गया है, जिससे निर्यात मांग जो बीते दिनों बढ़ी थी उसमें नरमी आ गई है। उन्होंने बताया कि कॉटन का भाव गुजरात में बीते दिनों जहां 47,000 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी में 356 किलो) हो गया था, वहां अब घटकर 4,600 रुपये प्रति कैंडी पर आ गया है।

गणत्रा ने बताया कि फरवरी के आखिर तक भारत का काटन निर्यात 34 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) हो चुका था और व्यक्तिगत तौर पर उनका अनुमान है कि चालू सीजन में भारत से 60 लाख गांठ तक निर्यात करेगा, हालांकि एसोसिएशन का अनुमान अब तक 54 लाख गांठ ही है, लेकिन इस महीने होने वाली बैठक में सदस्यों के बीच विचार-विमर्श किया जाएगा। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार, देश में रूई का उत्पादन चालू कॉटन सीजन 2020-21 (अक्टूबर-सितंबर) में 360 लाख गांठ है, पिछले साल का बकाया स्टॉक 125 लाख गांठ और आयात 14 लाख गांठ को मिलाकर कुल आपूर्ति 499 लाख गांठ रहेगी, जबकि घरेलू खपत मांग 330 लाख गांठ और निर्यात 54 लाख गांठ होने के बाद 30 सितंबर 2021 को 115 लाख गांठ कॉटन अगले सीजन के लिए बचा रहेगा।

हालांकि कपड़ा मंत्रालय के तहत गठित कमेटी ऑनफ कॉटन प्रोडक्शन एंड कन्जंप्शन (सीओसीपीसी) के अनुसार, देश में चालू सीजन 2020-21 में कॉटन का उत्पादन 371 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जिसमें से 28 फरवरी 2021 तक 294.73 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी थी।

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