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समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके

समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके
Image Source : AP Iran Protests on Hijab

किसान शोषण प्रतिरोध आंदोलन को लेकर तैयारियां जोरों पर

Farmer's exploitation resistance movement

पीलीबंगा. स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने, फसल उत्पादन की लागत मूल्य की डेढ गुणा राशि देने, आत्महत्या कर चुके किसानों के परिजनों को समुचित मुवाअजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, नहरों में पूरा पानी देने, गेहूं के समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद में प्रति क्विंटल 265 रूपये बोनस देने आदि 8 सूत्री मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकर्ताओं की ओर से सोमवार को सुबह दस बजे निकलने वाली महारैली को लेकर कार्यकर्ताओं की ओर से जोरशोर से तैयारियां की जा रही है।

माकपा जिला कमेटी सदस्य मनीराम मेघवाल ने बताया कि महारैली को सफल बनाने के लिए गठित की गई टीमें लगातार गांवों में समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके जनसम्पर्क कर रही है। शनिवार को टीमों ने करीब एक दर्जन गांवों में दौरा कर जनसम्पर्क किया।अखिल भारतीय किसान सभा तहसील सदस्य मेवाराम कालवा ने बताया समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके कि सभी कार्यकर्ता कृषक विश्राम गृह के सामने सोमवार सुबह दस बजे एकत्रित होंगे व यहां से मुख्य मार्गो से होती हुई महारैली उपखंड कार्यालय के सामने पहुंचेगी।

दूषित पेयजल को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन कल
पीलीबंगा. माणकथेड़ी में दूषित पेयजल सप्लाई के विरोध में ग्रामीणों की ओर से सोमवार सुबह 11 बजे उपखंड कार्यालय के सामने रोष प्रदर्शन किया जाएगा। इस संबंध में शनिवार को सेवानिवृत चिकित्सा कर्मचारी अर्जुनराम सहारण की अध्यक्षता में गांव के बाबा रामदेव समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके मंदिर में ग्रामीणों की सांझा बैठक हुई जिसमें अशुद्ध पेयजल आपूर्ति पर रोष प्रकट किया गया। बैठक में पूर्व सरपंच अमरसिंह भांभू ने कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाना विभाग की जिम्मेदारी है।

लेकिन बार बार अवगत करवाने पर भी विभाग इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा इससे ग्रामीणों में गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है। कृष्ण भाटी ने कहा कि वाटरवक्र्स की चारदीवारी नहीं होने से अवारा कुत्ते डिग्ग्यिों में प्रवेश कर नहाते है तथा यही दूषित पानी गांव में सप्लाई हो रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर ग्रामीणों को संगठित होने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए बिम्सटेक से मांगी मदद

बिम्सटेक क्षेत्र में आतंकवाद के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए सात देशों के इस समूह से ज्यादा सहयोग की मांग की है.

बिम्सटेक सम्मेलन में अन्य नेताओं के साथ मनमोहन सिंह

aajtak.in

  • ने पाई तॉ,
  • 30 नवंबर 1999,
  • (अपडेटेड 04 मार्च 2014, 4:10 PM IST)

बिम्सटेक क्षेत्र में आतंकवाद के बढ़ते खतरे के प्रति आगाह करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए सात देशों के इस समूह से ज्यादा सहयोग की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन देशों की सुरक्षा को अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता. तीसरे बिम्सटेक सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र को कई तरह की एक सी चुनौतियों - प्राकृतिक आपदा से लेकर आतंकवाद तक - का सामना करना पड़ रहा है जिसका समाधान सामूहिक तौर पर करना होगा ताकि एशिया और विश्व में शांति, समरसता, सुरक्षा और संपन्नता में महत्वपूर्ण योगदान किया जा सके.

उन्होंने कहा हमारी संपन्नता की तरह हमारी सुरक्षा भी एक दूसरे से जुड़ी है - चाहे हमारे क्षेत्र में संचार के सामुद्रिक संपर्क की सुरक्षा का मामला हो या फिर आतंकवाद की निरंतर चुनौती या फिर अंतरराष्ट्रीय अपराध से सुरक्षा की बात. इस समूह में शामिल सात सदस्य देशों - भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाइलैंड, म्यामां, भूटान और नेपाल - में विश्व की 20 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है और इनका सकल घरेलू उत्पाद 2,500 अरब डालर है.

प्रधानमंत्री समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके ने कहा बिम्सटेक क्षेत्र में बढ़ते आतंकवाद के खतरे के स्वरूप को देखते हुए इससे मुकाबले के लिए ज्यादा सहयोग की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के अंग के तौर पर समूह को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद प्रतिरोध में सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध में सहयोग और नशीली दवाओं के गैरकानूनी कारोबार के संबंध में सहयोग के जल्दी समर्थन करने और आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहयोग पर बिम्सटेक सम्मेलन पर जल्दी हस्ताक्षर करने की कोशिश होनी चाहिए. इसके अलावा प्रत्यर्पण पर बिम्सटेक सम्मेलन के संबंध में वार्ता शुरू होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक देश व्यापार, आर्थिक सहयोग और संपर्क के क्षेत्र में उपलब्ध मौकों के बारे में भी बात की और कहा कि यह हमारे उज्जवल भविष्य का संकेतक है. उन्होंने कहा कि बिम्सटेक के सपने को साकार करने के लिए भौतिक और डिजिटल संपर्क अहम है और यह इस क्षेत्र में सहयोग और एकजुटता से संभव है. बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पर बंगाल की खाड़ी की पहल (बिम्सटेक) भारत की 1990 के दशक की पूर्वोन्मुख नीति की अभिव्यक्ति है. यह थाइलैंड की पश्चिमोन्मुख नीति के साथ शुरू हुई थी.

सिंह ने कहा कि इकट्ठा होने पर समूह न सिर्फ दक्षिण एशिया या दक्षिण-पूर्व एशिया जैसी संकीर्ण, पारंपरिक परिभाषा के दायरे से निकलेगा बल्कि एशिया के सबसे उल्लेखनीय और गतिशील खंड को जोड़ने का भी काम करेगा. उन्होंने कहा कि भारत बिम्सटेक सदस्यों के बीच भारत-म्यांमा-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान बहु-स्वरूपीय पारगमन परिवहन परियोजना, एशियाई राजमार्ग नेटवर्क, आसियान संपर्क योजना और अन्य योजनाओं के जरिए भौतिक संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा हम जल्दी ही म्यामां के लिए सीधा जहाजमार्ग शुरू करेंगे जिससे हमारे क्षेत्र में बढ़ते सामुद्रिक संपर्क में और इजाफा होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा भौतिक बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ नियम भी बनाने की जरूरत है ताकि अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में सुविधा हो. व्यापार एवं आर्थिक सहयोग के संबंध में सिंह ने कहा कि यह बिम्सटेक देशों की प्राथमिकता की सूची में उच्च स्तर पर रहेगा. उन्होंने वस्तु व्यापार पर बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते को जल्दी पूरा करने और इसमें निवेश और सेवा क्षेत्र को भी जोड़े जाने के महत्व पर जोर दिया. उर्जा को एक अन्य प्राथमिक क्षेत्र बनाने के महत्व को रेखांकित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत और इसके कुछ पड़ोसी देश उर्जा ग्रिड के जरिए जुड़ रहे हैं और उन्हें इसका उर्जा सहयोग के मामले में क्षेत्रीय व राष्ट्रीय फायदा मिल रहा है. उन्होंने कहा हमें इसलिए अपने आपको एक दूसरे से पारेषण राजमार्गों और गैस एवं तेल पाइपलाइनों के जरिए जोड़ना चाहिए. साथ ही नवीन उर्जा के क्षेत्र में सहयोग के मौकों का परीक्षण भी करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने उम्मीद समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके जताई कि बेंगलुरू में जिस बिम्सटेक उर्ज केंद्र बनाने की योजना बनी है उसकी इसमें प्रमुख भूमिका होगी. पर्यटन को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण स्रोत बताते हुए सिंह ने कहा कि यह अवाम और संस्कृति को भी जोड़ने का काम करता है.

प्रधानमंत्री ने 2015 को बिम्सटेक पर्यटन वर्ष घोषित करने का भी सुझाव दिया. इस क्षेत्र में मौसम पर आर्थिक निर्भरता और प्राकृतिक आपदा के प्रति संवेदनशीलता का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में सहयोग महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दिल्ली के पास नोएडा स्थित बिम्सटेक मौसम एवं जलवायु केंद्र तुरंत ही परिचालन में आ जाएगा. आज इस केंद्र के गठन के संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. सिंह ने घोषणा की कि भारत अपने यहां पारंपरिक दवाओं के अध्ययन के लिए बिम्सटेक छात्रों को दी जाने वाली 30 आयुष छात्रवृत्ति की पेशकश का नवीकरण करेगा. नयी दिल्ली में 2008 में हुए सम्मेलन में सिंह ने बिम्सटेक देशों के छात्रों के लिए 450 छात्रवृत्तियों की घोषणा की थी जो अब तिगुनी बढ़ गई है और यह भारत के बिम्सटेक भागीदारों को मिल रही है.

SAE मोटर वाहन मानक टेस्ट

एसएई इंटरनेशनल ऑटोमोटिव इंजीनियर्स इंटरनेशनल की सोसायटी के लिए खड़ा है, जिसका अर्थ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स की सोसायटी है। एसएई इंटरनेशनल एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और वाणिज्यिक वाहन क्षेत्रों में करीब 1,000 इंजीनियरों और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों का एक वैश्विक संघ है। यह मानवता के लाभ के लिए गतिशीलता की जानकारी और समाधान पैदा करता है। विमानन, मोटर वाहन और वाणिज्यिक वाहन क्षेत्रों में परिवर्तन और विकास जारी है। यह परिवर्तन नई और विकासशील प्रौद्योगिकियों समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके और व्यावसायिक अनुप्रयोगों को एक साथ लाता है। एसएई इंटरनेशनल सभी प्रकार के मोटर वाहनों पर तकनीकी जानकारी विकसित करता है, जिसमें वैमानिकी, विमान, ऑटोमोबाइल, ऑफ-रोड उपकरण, समुद्री वाहन, रेलवे वाहन, ट्रक और बस शामिल हैं।

एसएई इंटरनेशनल द्वारा अपनी दृष्टि के अनुसार विकसित मानकों को निम्नलिखित शीर्षकों के तहत वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • AeroPaks मानक आठ हजार से अधिक SAE विमानन मानकों, विनिर्देशों, अनुशंसित प्रथाओं और संसाधन दस्तावेजों को कवर करते हैं।
  • Jpaks मानकों में दो हजार से अधिक SAE ग्राउंड वाहनों के मानक शामिल हैं।
  • एयरोस्पेस गुणवत्ता मानक उड्डयन उद्योग द्वारा व्यापक रूप से स्वीकृत मानकों का एक समूह है। यह निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं का समर्थन करने और ग्राहकों की मांग को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सुधार उपकरण प्रदान करता है।
  • J1939 मानक भारी शुल्क वाले वाहनों के लिए नियंत्रकों के क्षेत्र नेटवर्क के SAE अंतर्राष्ट्रीय मानक परिवार हैं।

इन मानकों में भागों, उपकरण और सिस्टम भी शामिल हैं। ये सभी मानक संबंधित क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देते हैं और डिजाइन, उत्पादन और अंतर के सिद्धांतों को विनियमित करते हैं। उत्पादन गतिविधियाँ स्थिरता, उच्च गुणवत्ता और अधिकतम प्रदर्शन पर आधारित हैं।

जैसे-जैसे ऑटोमोबाइल विनिर्माण प्रौद्योगिकियां विकसित होती हैं, वैसे-वैसे ऑटोमोबाइल की संख्या बढ़ जाती है। इससे ऊर्जा आवश्यकताओं की समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके अधिक कमी हुई है। इस संदर्भ में, विशेष रूप से यह तथ्य कि निकट भविष्य में जीवाश्म संसाधन समाप्त हो जाएंगे, दुनिया में ऊर्जा भंडार के अधिक कुशल उपयोग की आवश्यकता है। मोटर वाहनों में ऊर्जा के उपयोग को अधिक कुशल बनाने के लिए, जिन तरीकों को लागू किया जा सकता है उनमें से एक है वाहनों के उपयोग के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना। सैद्धांतिक रूप से, वाहनों पर काम करने वाले विभिन्न बल ऊर्जा हानि का कारण बनते हैं। शायद इन ताकतों में सबसे महत्वपूर्ण रोल प्रतिरोध बल है। ऑपरेटिंग प्रतिरोध जो रोलिंग प्रतिरोध को प्रभावित करते हैं, वे हैं गति, मुद्रास्फीति दबाव और भार। यदि इन बलों को नियंत्रित किया जा सकता है, तो ऑटोमोबाइल में ईंधन की बचत की जा सकती है। ये रोलिंग प्रतिरोध मानक मापने की तकनीक SAE J1269 और SAE J1270 मानकों में शामिल हैं:

  • J1269-200609 यात्री कारों, हल्के ट्रकों और सड़क ट्रक और बस टायर के लिए रोलिंग प्रतिरोध माप प्रक्रिया

यह मानक प्रयोगशाला में वायवीय यात्री, हल्के ट्रक और सड़क ट्रक और बस टायर के रोलिंग प्रतिरोध की माप पर लागू होता है। शून्य पर्ची और झुकाव कोण के साथ स्थिर अवस्था में काम करने के लिए यह प्रक्रिया केवल फ़्रीव्हील टायरों के लिए मान्य है।

  • J1270-201710 यात्री कार, हल्के ट्रक और सड़क ट्रक और बस टायर के रोलिंग प्रतिरोध का मापन

इस मानक के अनुसार, बल, टॉर्क और पॉवर मेजरमेंट मेथड सभी सामान्य उपयोग में हैं और एक ही परीक्षा परिणाम देना चाहिए। स्टीयरिंग, ट्रैक्शन, सतही बनावट और स्थिर टायर प्रसंस्करण के प्रभावों को अनुशंसित अनुप्रयोगों से बाहर रखा गया है क्योंकि वे अभी भी अनुसंधान चरण में हैं।

इन दो उदाहरणों के अलावा, एसएई इंटरनेशनल द्वारा डिज़ाइन और प्रकाशित हजारों मानक हैं, और माप, परीक्षण और विश्लेषण सेवाएं इन मानक मानदंडों के अनुरूप अधिकृत संस्थानों द्वारा प्रदान की जाती हैं।

हमारी कंपनी अन्य परीक्षण सेवाओं के दायरे में SAE मानकों की परीक्षण सेवाएँ भी प्रदान करती है। इन सेवाओं के लिए धन्यवाद, उद्यम सुरक्षित, तेज और निर्बाध तरीके से अधिक कुशल, उच्च प्रदर्शन और गुणवत्ता वाले उत्पादों का उत्पादन करने में सक्षम हैं।

अन्य परीक्षण सेवाओं के दायरे में प्रदान की जाने वाली एसएई मानक परीक्षण सेवाएँ इस संबंध में हमारे संगठन द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं में से केवल एक हैं। कई अन्य परीक्षण सेवाएँ भी उपलब्ध हैं।

Iran Protests: ईरान में हिजाब विरोधी को लेकर अब भी प्रदर्शन जारी, ये प्रतिरोध के लंबे इतिहास पर है आधारित

Iran Protests: कई ईरानी महिलाओं ने, विशेष रूप से प्रमुख शहरों में, लंबे समय से अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर विरोध का रुख रखा है, जिसमें युवा पीढ़ी ढीले स्कार्फ और पोशाक पहन कर रूढ़िवादी पोशाक के दायरे को चुनौती देती हैं।

Shilpa

Written By: Shilpa
Updated on: September 29, 2022 13:06 IST

Iran Protests on Hijab- India TV Hindi

Image Source : AP Iran Protests on Hijab

Highlights

  • ईरान में हिजाब को लेकर विरोध प्रदर्शन
  • महासा अमीनी नाम की लड़की की हुई मौत
  • सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

Iran Protests: इस्लामी धार्मिक स्थलों के लिए मशहूर रूढ़िवादी ईरानी शहर मशहद में एक युवती कार पर चढ़कर अपना विरोध जता रही है। वह अपना हिजाब उतारती है और नारे लगाने लगती है, “डेथ टू द डिक्टेटर!” (तानाशाह की मौत)। आस-पास के प्रदर्शनकारी भी उनके सुर में सुर मिलाते हैं और अपनी गाड़ियों का हॉर्न उसके समर्थन में बजाते हैं। मशहद में ही पली-बढ़ी फातिमा शम्स कहती हैं कि कई ईरानी महिलाएं एक दशक पहले तक इस तरह की तस्वीर के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं।


उन्होंने कहा, “जब आप मशहद में महिलाओं को सड़कों पर उतरकर सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब जलाते हुए देखते हैं तो यह वास्तव में क्रांतिकारी बदलाव है। ईरानी महिलाएं परदे वाले समाज और अनिवार्य हिजाब के दौर का अंत कर रही हैं।” ईरान में बीते कुछ सालों में कई प्रदर्शन हुए हालांकि उनमें से अधिकतर की वजह आर्थिक दुश्वारियों की वजह से उपजा गुस्सा था। विरोध की नई लहर लेकिन ईरान के मौलवी के नेतृत्व वाले शासन के खिलाफ दिलों में भरे रोष को दिखा रही है और यह गुबार अनिर्वाय हिजाब के मुद्दे पर निकल रहा है।

ईरान में बुर्का और हिजाब अनिवार्य

ईरान में महिलाओं के लिए बुर्का और हिजाब पहनकर सार्वजनिक रूप से बाहर निकलना अनिवार्य है। इसमें भी हिजाब से उनके बाल पूरी तरह ढके होने चाहिए। कई ईरानी महिलाओं ने, विशेष रूप से प्रमुख शहरों में, लंबे समय समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके से अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर विरोध का रुख रखा है, जिसमें युवा पीढ़ी ढीले स्कार्फ और पोशाक पहन कर रूढ़िवादी पोशाक के दायरे को चुनौती देती हैं। हालांकि सभी के लिए इसका अंत सुखद नहीं होता। राजधानी तेहरान में 22 वर्षीय महसा अमीनी को पुलिस ने हिजाब विरोधी रुख के चलते गिरफ्तार किया था और हिरासत में उसकी मौत हो गई थी।

अमीनी की मौत के बाद लगभग दो सप्ताह तक व्यापक अशांति रही और समर्थन और प्रतिरोध बनाने के तरीके यह ईरान के अन्य प्रांतों में फैल गई है और छात्रों, मध्यम वर्ग के पेशेवरों और कामकाजी वर्ग के पुरुषों और महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर इसका विरोध किया।

ईरान का हिजाब कानून क्या है?

इस्लामी क्रांति (1978-79) के बाद ईरान ने 1981 में एक अनिवार्य हिजाब कानून पारित किया था। इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 638 में कहा गया है कि महिलाओं का सार्वजनिक रूप से या सड़कों पर हिजाब के बिना दिखाई देना अपराध है। द गार्जियन ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि ईरानी अधिकारी उन महिलाओं की पहचान करने के लिए सार्वजनिक परिवहन में फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, जो हिजाब नियमों का ठीक से पालन नहीं कर रही हैं।

इसी साल जुलाई में नेशनल हिजाब और चैसटिटी डे (राष्ट्रीय हिजाब और शुद्धता दिवस) पर ईरान में व्यापक विरोध देखा गया, जहां महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से अपने हिजाब को हटाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था। कई लोगों ने सार्वजनिक परिवहन में हिजाब नहीं पहनने की तस्वीरें और वीडियो भी पोस्ट किए थे।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने जुलाई में ईरान के हिजाब और शुद्धता कानून को नए प्रतिबंधों के साथ लागू करने के लिए एक आदेश पारित किया था। सरकार ने 'अनुचित तरीके से हिजाब' पहनने जैसे मामलों को रोकने के लिए हाई हील्स और मोजा पहनने के खिलाफ भी आदेश जारी किया। इस आदेश में महिलाओं के लिए अपनी गर्दन और कंधों को ढंकना अनिवार्य कर दिया गया।

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