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फंड का सेक्टर

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सांकेतिक तस्वीर।

Sector Fund vs Thematic Funds: सेक्टर फंड्स और थीमैटिक फंड्स में क्या है अंतर? क्या है इनमें निवेश का नफा नुकसान?

सेक्टोरल फंड और थीमैटिक फंड दोनों ही ज्यादा जोखिम वाले निवेश हैं. इनमें पैसे लगाने से पहले इनसे जुड़े फायदे और नुकसान को समझना जरूरी है.

Sector Fund vs Thematic Funds: सेक्टर फंड्स और थीमैटिक फंड्स में क्या है अंतर? क्या है इनमें निवेश का नफा नुकसान?

जब एक स्पेसिफिक सेक्टर में निवेश किया जाता है, तो उन्हें सेक्टोरल फंड कहा जाता है.

Sector Fund vs Thematic Funds: म्युचुअल फंड में जब एक स्पेसिफिक सेक्टर में निवेश किया जाता है, तो उन्हें सेक्टोरल फंड कहा जाता है. इसमें केवल उन बिजनेस में निवेश किया जाता है, जो किसी स्पेसिफिक सेक्टर या इंडस्ट्री में काम करते हैं. उदाहरण के लिए, सेक्टर फंड के तहत बैंकिंग, फार्मा, कंस्ट्रक्शन या एफएमसीजी समेत कई अन्य सेक्टरों में निवेश किया जाता है. दूसरी ओर, थीमैटिक फंड वे हैं जिसमें किसी पर्टिकुलर थीम के आधार पर शेयरों में निवेश किया जाता है. ऐसे फंडों द्वारा चुनी गई थीम रूरल कंजप्शन, कमोडिटी, डिफेंस जैसे सेक्टरों के इर्द-गिर्द घूम सकती है. उदाहरण के लिए, थीमैटिक फंड में रूरल कंजप्शन पर फोकस किया जा सकता है और इस थीम के तहत सभी सेक्टरों के फंड में निवेश किया जा सकता है. इन फंड का सेक्टर दोनों फंडों के बीच बड़ा अंतर यह है कि सेक्टोरल फंड केवल एक सेक्टर में निवेश करते हैं, जबकि थीमैटिक फंड कई सेक्टरों में निवेश करते हैं, जो एक कॉमन थीम पर आधारित होते हैं.

सेक्टोरल फंड क्या होते हैं

सेक्टोरल फंड केवल स्पेसिफिक सेक्टरों जैसे फार्मा, कंस्ट्रक्शन, एफएमसीजी में निवेश करने के लिए जाने जाते हैं. सेबी फंड का सेक्टर द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स के अनुसार, सेक्टोरल फंड में संपत्ति का कम से कम 80% हिस्सा स्पेसिफाइड सेक्टरों में निवेश करना जरूरी है. शेष 20% हिस्सा अन्य डेट या हाइब्रिड सिक्योरिटीज में आवंटित किया जा सकता है. सेक्टोरल फंड अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं. यह मार्केट कैपिटलाइजेशन, इन्वेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव और सिक्योरिटीज के सेट में अलग-अलग हो फंड का सेक्टर सकते हैं.

इस फंड के तहत प्राकृतिक संसाधनों, उपयोगिताओं, रियल एस्टेट, वित्त, हेल्थ केयर, टेक्नोलॉजी, कन्यूनिकेशन जैसे कई सेक्टरों में निवेश किया जा सकता है. कुछ सेक्टर फंड बैंकिंग जैसी सब-कैटेगरी पर भी फोकस करते हैं. सेक्टर फंड आदर्श रूप से एक्टिव और एजुकेटेड निवेशकों के लिए होते हैं जो अक्सर कई सेक्टरों की मैक्रो-इकोनॉमिक सिचुएशन का विश्लेषण करते हैं.

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थीमैटिक फंड क्या हैं

थीमैटिक फंड वे होते हैं जो किसी खास थीम के आधार पर शेयरों में निवेश करते हैं. ये फंड उन सेक्टरों में निवेश करते हैं जो एक स्पेसिफिक थीम का पालन करते हैं. सेबी फंड का सेक्टर के गाइडलाइन्स के अनुसार, थीमैटिक फंडों को अपनी संपत्ति का 80% किसी पर्टिकुलर थीम के शेयरों में, अलग-अलग सेक्टरों में निवेश करना होता है. स्टॉक और पोर्टफोलियो कंस्ट्रक्शन की संख्या के संदर्भ में, थीमैटिक फंड इक्विटी स्कीम्स के समान ही डायवर्सिफाइड हैं. थीमैटिक फंड अलग-अलग थीम जैसे मल्टी-सेक्टर, इंटरनेशनल एक्सपोजर, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड, रूरल इंडिया समेत कई सेक्टरों में निवेश करते हैं. इन फंडों को डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड या लार्ज कैप इक्विटी फंड की तुलना में जोखिम भरा माना जाता है.

थीमैटिक फंड के निवेशकों को स्कीम में एंट्री करने और बाहर निकलने के लिए कम से कम 5 साल का समय लेना चाहिए और फंड को सकारात्मक प्रदर्शन करने देना चाहिए. यह सुझाव दिया जाता है कि केवल मध्यम रूप से उच्च जोखिम लेने की क्षमता वाले निवेशकों को थीमैटिक फंड में निवेश करने पर विचार करना चाहिए.

नॉलेज: 4 तरह के होते हैं म्यूचुअल फंड, 500 रुपए से कर सकते हैं निवेश की शुरुआत

म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाती हैं। इस पैसे को वे शेयरों में निवेश करती हैं - Dainik Bhaskar

अच्‍छे रिटर्न के लिए म्‍युचुअल फंड में निवेश करना सही विकल्प हो सकता है। लेकिन अभी भी काफी लोगों को यह नहीं पता है कि म्‍युचुअल फंड स्कीम क्या हैं? और इनमें निवेश कैसे किया जाता है? म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से पैसे जुटाती हैं। इस पैसे को वे शेयरों में निवेश करती हैं। इसके बदले म्‍युचुअल फंड निवेशकों से चार्ज भी लेती हैं। जो लोग शेयर बाजार में निवेश के बारे में बहुत नहीं जानते, उनके लिए म्यूचुअल फंड निवेश का अच्छा विकल्प है। हम आपको म्यूचुअल फंड के बारे में बता रहे हैं।

इक्विटी म्यूचुअल फंड
ये स्कीम निवेशकों की रकम को सीधे शेयरों में निवेश करती है। छोटी अवधि में ये स्कीम जोखिम भरी हो सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि में इसे आपको बेहतरीन रिटर्न देने वाला माना जाता है। इस तरह की स्कीम में निवेश से आपका रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि शेयर का प्रदर्शन कैसा है। जिन निवेशकों का वित्तीय लक्ष्य 10 साल बाद पूरा होना है, वे इस तरह की म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश कर सकते हैं।

डेट म्यूचुअल फंड
ये म्यूचुअल फंड स्कीम डेट सिक्योरिटीज में निवेश करती हैं. छोटी अवधि के वित्तीय लक्ष्य पूरे करने के लिए निवेशक इनमें निवेश कर सकते हैं। 5 साल से कम अवधि के लिए इनमें निवेश करना ठीक है। ये म्यूचुअल फंड स्कीम शेयरों की तुलना में कम जोखिम वाली होती हैं और बैंक के फिक्स्ड डिपाजिट की तुलना में बेहतर रिटर्न देती हैं।

हाइब्रिड म्यूचुअल फंड स्कीम
ये म्यूचुअल फंड स्कीम इक्विटी और डेट दोनों में निवेश करती हैं। इन स्कीम को चुनते वक्त भी निवेशकों को अपने जोखिम उठाने की क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। हाइब्रिड म्यूचुअल फंड स्कीम को छह कैटेगरी में बांटा गया है।

सॉल्यूशन ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम
सॉल्यूशन ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम किसी खास लक्ष्य या समाधान के फंड का सेक्टर हिसाब से बनी होती हैं। इनमें रिटायरमेंट स्कीम या बच्चे की शिक्षा जैसे लक्ष्य हो सकते हैं। इन स्कीम में आपको कम से कम 5 साल के लिए निवेश करना जरूरी होता है। इसमें निवेश करके आप अच्छा रिटर्न पा सकते हैं।

म्‍युचुअल फंड में तीन तरह से निवेश किया जा सकता है। इसमें पूरी तरह से ऑनलाइन से लेकर फार्म भरकर निवेश किया जा सकता है। म्‍युचुअल फंड में लगाया गया पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। इसलिए कई लोगों को लगता है कि इसके लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है, हालांकि ऐसा नहीं है। म्‍युचुअल फंड में निवेश बिना DEMAT अकाउंट के भी निवेश किया जा सकता है।

पहला तरीका
यह तरीका काफी आम है। इसमें किसी एजेंट के माध्‍यम से निवेश करना होता है। अगर एजेंट को खोजने में दिक्‍कत हो तो जिस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उस कंपनी की वेबसाइट से टोल फ्री नम्‍बर लेकर बात कर सकते हैं। कंपनी आपके इलाके में जो एजेंट हैं उससे संपर्क करा देगी। फिर इस एजेंट की मदद से आप निवेश कर सकते हैं।

दूसरा तरीका
ब्रोकर या किसी म्‍युचुअल फंड बेचने वाली वेबसाइट के माध्‍यम से भी निवेश किया जा सकता है। कई लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं वह अपने ब्रोकर अकाउंट के माध्‍यम से भी म्‍युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसके अलावा देश में एक दर्जन से ज्‍यादा वेबसाइट हैं जो म्‍युचुअल फंड बेचती हैं। लोग इन वेबसाइट पर अपना रजिस्‍ट्रेशन कराने के बाद म्‍युचुअल फंड खरीद सकते हैं। अगर जरूरत हो तो यह वेबसाइट अपने एजेंट भी निवेशक के पास मदद के लिए भेजती है।

तीसरा तरीका
डायरेक्‍ट प्‍लान में निवेश। सेबी के आदेश के बाद सभी म्‍युचुअल फंड कंपनियां अपनी सभी स्‍कीम्‍स में डायरेक्‍ट प्‍लान का ऑप्‍शन देती हैं। इनमें निवेश पूरी तरह से ऑनलाइन होता है। आप म्‍युचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट पर जाकर सीधे स्‍कीम चुनते हैं और कुछ स्‍टेप में निवेश की प्रक्रिया पूरी करते हैं। यहां पर पेमेंट भी ऑनलाइन करना होता है।

चौथा तरीका
अब पेटीएम मनी ऐप (PayTm Money App) की मदद से आप किसी भी म्‍युचुअल फंड में फंड का सेक्टर निवेश कर सकते हैं। पेटीएम मनी ऐप की मदद से आप निवेश करने के साथ-साथ अपने पोर्टफलियो को भी आसानी से चेक कर सकते हैं। इसके लिए आपको अलग से कोई कमीशन या फीस नहीं देनी होगी।

शेयर बाजार से जुड़े रिस्क
म्‍युचुअल फंड अपनी इक्विटी स्‍कीम में जुटाए पैसों का निवेश शेयर बाजार में करते हैं। स्‍टॉक मार्केट के बारे में कुछ भी भविष्‍यवाणी करना कठिन होता है। इसी कारण इक्विटी म्‍युचुअल फंड में निवेश रिस्‍की माना जाता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि थोड़ा-थोड़ा पैसा लम्‍बे समय तक लगाया जाए तो अच्‍छा रिटर्न पाया जा सकता है।

सवाल: क्या आप किसी म्यूचुअल फंड में अपना सारा पैसा खो सकते हैं?
जवाब: बाज़ार से जुड़े होने के कारण, म्यूचुअल फंड में जोखिम बना रहता है, इसलिए निवेश की गई मूल राशि का नुकसान हो सकता है। हालांकि, म्यूचुअल फण्ड के प्रदर्शन को देखते हुए कहा जा सकता है कि आपके सभी पैसे खोने की संभावना कम है।

सवाल: किसी म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने के लिए आपको कितना धन चाहिए?
जवाब: आपके द्वारा निवेश किए जाने वाले फंड के आधार पर न्यूनतम निवेश राशि भिन्न हो सकती है। हालाँकि, आप न्यूनतम 500 रु. निवेश कर सकते हैं।

सवाल: क्या मैं म्यूचुअल फंड कभी भी बेच सकता हूं?
जवाब: अधिकांश म्यूचुअल फंड ओपन एंडेड होते हैं, मतलब आप उन्हें कभी भी बेच सकते हैं। आमतौर पर क्लोज एंड स्कीम की 3-4 वर्ष की लॉक-इन अवधि होती है। एक दूसरे तरीके की स्कीम है जिसमें, म्यूचुअल फन कुछ समय के लिए लॉक-इन हो जाते हैं, लेकिन इसके बाद ओपन एंडेड हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, टैक्स सेविंग या ELSS की लॉक-इन अवधि 3 साल है। इस अवधि के बाद, आप ये फंड किसी भी समय बेच सकते हैं।

सवाल: क्या म्यूचुअल फंड में निवेश करना टैक्स-फ्री है?
जवाब: नहीं, म्यूचुअल फंड शोर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) नियम के अधीन हैं। अलग-अलग म्यूचुअल फंड जैसें, इक्विटी और डेट पर कई तरह का टैक्स लगता है। म्यूचुअल फंड लाभांश के मामले में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) लागू हो जाता है और फंड के अनुसार स्रोत पर टैक्स कटौती की जाती है।

पर्सनल फाइनेंस: सेक्टर फंड्स में निवेश आपको दिला सकता है ज्यादा फायदा, लेकिन इसमें पैसा लगाना हो सकता है थोड़ा रिस्की

अच्‍छे रिटर्न के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना सही विकल्प हो सकता है। जो ज्यादा रिटर्न के लिए ज्यादा रिस्क उठा सकता हैं वे म्यूचुअल फंड की सेक्टर फंड्स में निवेश कर सकते हैं। बड़े रिस्क उठा सकने वाले म्यूचुअल फंड्स में माहिर इक्विटी इन्वेस्टर्स किसी सेक्टर में तेजी की संभावना पर दांव लगाते हैं। ये फंड्स ओपन एंडेड होते हैं और इनको किसी भी वर्किंग डे में सब्सक्राइब किया जा सकता है और रिडीम कराया जा सकता है।

सेक्टर म्यूचुअल फंड क्या हैं
एक सेक्टर फंड एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है जो अर्थव्यवस्था के विशिष्ट क्षेत्रों, जैसे बैंकिंग, दूरसंचार, एफएमसीजी, फार्मास्युटिकल, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), और बुनियादी ढांचे में निवेश करता है। दूसरे शब्दों में, सेक्टर फंड्स आपके निवेशित धन को केवल विशिष्ट उद्योग या सेक्टर तक सीमित कर देते हैं। इनमें ऊंचा रिटर्न मिलते की उम्मीद रहती है, लेकिन ये बंटे हुए इक्विटी फंड की तुलना में रिस्की होते हैं। लिहाजा निवेशकों को किसी उन सेक्टरों की परफॉमरेंस के बारे में पहले से जानकारी होनी जरूरी है।

उदाहरण के लिए, एक बैंकिंग सेक्टर फंड बैंकों में निवेश कर सकता है और एक फार्मा फंड फंड का सेक्टर केवल फार्मा कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकता है। इन फंडों के फंड मैनेजर उन कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाते हैं जो बाजार में अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। इस तरह के निवेश का उद्देश्य उन क्षेत्रों में निवेश करना है जो भविष्य में ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं।

इन फंड्स में किन्हें इनवेस्ट करना चाहिए?
एक्सपर्ट का मानना है कि सेक्टर फंड्स में डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा रिस्क होता है। इसलिए ये फंड्स उन इनवेस्टर्स के लिए सही माने जाते हैं, जो ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा उन्हें म्यूचुअल फंड्स की अच्छी समझ होना भी जरूरी है। इसमें 3 से 5 साल के लिए इनवेस्टमेंट किया जा सकता है।

कितना निवेश करना रहेगा सही?
सेक्टर फंड्स में ज्यादा रिस्क होने के चलते एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनवेस्टर्स किसी एक सेक्टर फंड में अपने पोर्टफोलियो का 5 से 10% तक ही इनवेस्ट करने के बारे में सोचना चाहिए। इससे इस कैटेगरी अगर आपको नुकसान होता भी है तो आप इस नुकसान को दूसरी जगह से कवर कर सकते हैं।

सेक्टर फंड क्या है और इससे जुड़े रिस्क

सेक्टर फंड्स के रिस्क सेक्टर फंड्स में बड़े रिस्क उठा सकने वाले म्यूचुअल फंड्स के माहिर इक्विटी इन्वेस्टर्स किसी सेक्टर में तेजी की संभावना पर दांव लगाते हैं। ये फंड्स ओपन एंडेड होते हैं और इनको किसी भी वर्किंग डे में सब्सक्राइब किया जा सकता है और रिडीम कराया जा सकता है।

इन फंड्स में किन्हें इनवेस्ट करना चाहिए? क्या सेक्टर फंड्स में ज्यादा रिस्क होता है? फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि सेक्टर फंड्स में डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा रिस्क होता है। इसलिए ये फंड्स उन इनवेस्टर्स के लिए सही माने जाते हैं, जिन्हें लगता है कि एक खास ग्रुप के शेयरों का परफॉर्मेंस मार्केट इंडेक्स से बेहतर हो सकता है। कई बार ज्यादा रिस्क लेने में इंटरेस्ट रखने वाले रेगुलर इक्विटी इनवेस्टर भी इन पर दांव लगाते हैं। ऐसे फंड का इस्तेमाल कोर पोर्टफोलियो होल्डिंग को सपोर्ट करने में भी होता है। इनमें 3 से 5 साल के लिए इनवेस्टमेंट किया जा सकता है।

सेक्टर फंड्स में पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा लगाना चाहिए? सेक्टर फंड्स का ऐक्सपोजर किसी एक सेक्टर या चुनिंदा शेयरों में होता है, इसलिए उनमें डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड के मुकाबले ज्यादा रिस्क होता है। इनके फंड मैनेजर्स के पास सेक्टर में ऐक्सपोजर बहुत कम करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती, भले ही उसका परफॉर्मेंस लगातार खराब हो रहा हो। मिसाल के लिए अगर इकनॉमी स्लोडाउन की गिरफ्त में है तो इनवेस्टर्स FMCG, फार्मा और IT जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स की तरफ भागते हैं, लेकिन अगर बैंकिंग सेक्टर फंड का एक्सपोजर बैंकिंग सेक्टर में ही होगा, जिससे उनको नुकसान होने का खतरा बनेगा। सेक्टर फंड्स में ज्यादा रिस्क होने के चलते फाइनेंशियल प्लानर्स को लगता है कि इनवेस्टर्स किसी एक सेक्टर फंड में अपने पोर्टफोलियो का 5 से 10 पर्सेंट तक ही इनवेस्ट करने के बारे में सोचना चाहिए।

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सेक्टर फंड्स और इनमें निवेश के जोखिम

फाइनैंशल प्लानर्स मानते हैं कि सेक्टर फंड्स में डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा रिस्क होता है। इसलिए ये फंड का सेक्टर फंड्स उन इन्वेस्टर्स के लिए सही माने जाते हैं, जिन्हें लगता है कि एक खास ग्रुप के शेयरों का परफॉर्मेंस मार्केट इंडेक्स से बेहतर हो सकता है।

Mutual-Fund

सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली
सेक्टर फंड्स में बड़े रिस्क उठा सकने वाले म्यूचुअल फंड्स के माहिर इक्विटी इन्वेस्टर्स किसी सेक्टर में तेजी की संभावना पर दांव लगाते हैं। ये फंड्स ओपन एंडेड होते हैं और इनको किसी भी वर्किंग डे में सब्सक्राइब किया जा सकता है और रिडीम कराया जा सकता है।

सेक्टर फंड क्या होते हैं?
यह एक म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो पूरा का पूरा कॉरपस या उसका बड़ा हिस्सा किसी एक सेक्टर में लगाती है। कुछ इन्वेस्टर्स सेक्टर फंड्स तब चुनते हैं, जब उन्हें लगता है कि वह सेक्टर पूरे मार्केट को आउटपरफॉर्म करेगा। दूसरे इन्वेस्टर्स पोर्टफोलियो में शामिल दूसरी होल्डिंग्स की हेजिंग करने के मकसद से सेक्टर फंड्स पर दांव लगाते हैं। मिसाल के लिए अगर आपको लगता है कि आने वाले दिनों में कई रेट कट्स हो सकते हैं, जिससे बैंकों को फायदा हो सकता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा बैंकिंग सेक्टर फंड्स को होगा। सेक्टर फंड्स मार्केट के मुकाबले ज्यादा रिस्की होते हैं और ज्यादा उथल-पुथल वाले होते हैं क्योंकि इनमें डायवर्सिफिकेशन बहुत कम होता है। हालांकि रिस्क लेवल सेक्टर पर निर्भर करता है।

इंडिया में किस तरह के सेक्टर फंड्स हैं?
यहां कुछ कॉमन सेक्टर फंड्स FMCG, IT, फार्मा, बैंकिंग ऑटो और इन्फ्रा सेगमेंट के हैं। बैंकिंग और इन्फ्रा ETF जैसे कुछ ETF सेक्टर फंड्स भी हैं।

इन फंड्स में किन्हें इन्वेस्ट करना चाहिए? क्या सेक्टर फंड्स में ज्यादा रिस्क होता है?
फाइनैंशल प्लानर्स मानते हैं कि सेक्टर फंड्स में डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा रिस्क होता है। इसलिए ये फंड्स उन इन्वेस्टर्स के लिए सही माने जाते हैं, जिन्हें लगता है कि एक खास ग्रुप के शेयरों का परफॉर्मेंस मार्केट इंडेक्स से बेहतर हो सकता है। कई बार ज्यादा रिस्क लेने में इंट्रेस्ट रखने वाले रेग्युलर इक्विटी इन्वेस्टर भी इन पर दांव लगाते हैं। ऐसे फंड का इस्तेमाल कोर पोर्टफोलियो होल्डिंग को सपॉर्ट करने में भी होता है। इनमें 3 से 5 साल के लिए इन्वेस्टमेंट किया जा सकता है।

सेक्टर फंड्स में पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा लगाना चाहिए?
सेक्टर फंड्स का एक्सपोजर किसी एक सेक्टर या चुनिंदा शेयरों में होता है, इसलिए उनमें डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड के मुकाबले ज्यादा रिस्क होता है। इनके फंड मैनेजर्स के पास सेक्टर में एक्सपोजर बहुत कम करने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती, भले ही उसका परफॉर्मेंस लगातार खराब हो रहा हो। मिसाल के लिए अगर इकॉनमी स्लोडाउन की गिरफ्त में है तो इन्वेस्टर्स FMCG, फार्मा और IT जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स की तरफ भागते हैं, लेकिन अगर बैंकिंग सेक्टर फंड का एक्सपोजर बैंकिंग सेक्टर में ही होगा, जिससे उनको नुकसान होने का खतरा बनेगा। सेक्टर फंड्स में ज्यादा रिस्क होने के फंड का सेक्टर चलते फाइनैंशल प्लानर्स को लगता है कि इन्वेस्टर्स किसी एक सेक्टर फंड में अपने पोर्टफोलियो का 5 से 10 पर्सेंट तक ही इनवेस्ट करने के बारे में सोचना चाहिए।

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