बाइनरी वैकल्पिक व्यापार की मूल बाते

आधुनिक बाजार

आधुनिक बाजार

मक्का हार्वेस्टिंग मशीन : मक्का की कटाई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र

भारत में मक्का की विभिन्न किस्मों की खेती रबी, जायद और खरीफ़ तीनों सीजन में की जाती है। देश के एक मुख्य अनाज के रूप में यह चावल और गेहूं के बाद तीसरी सर्वाधिक उगाई जाने वाली फसल है। स्वाद और पोषण से भरपूर होने के कारण बाजार में मक्का की मांग हमेशा बनी रहती है। जिसके कारण किसानों के लिए यह एक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है। लेकिन मक्के की कटाई में श्रमिक लागत और फसल को बाजार तक पहुंचाने में इस लाभ का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। हालाँकि इस खर्च को बचाने के लिए बाजार में तरह-तरह की मशीनें उपलब्ध है। जिनके प्रयोग से किसान कटाई में लगने वाली लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आधुनिक बाजार आज हम अपने आर्टिकल में आपको ऐसी ही मशीन के बारे में बताएंगे जिससे आप आसानी से मक्का के साथ-साथ गेहूं और धान की फसल कटाई भी कर सकेंगे l इस मशीन से जुड़ी अधिक जानकारी यहां से देखें।

क्या है मक्का कटाई मशीन?

यह एक कंबाइन हार्वेस्टर मशीन है। जिसमें अलग-अलग प्रकार के हेड को आधुनिक बाजार जोड़कर धान, मक्का और गेहूं जैसी फसलों की कटाई की जा सकती है। इस मशीन के कटर-बार में लगे चाकू से फसल की कटाई होती है। इसके बाद फसल कन्वेयर बेल्ट के द्वारा रेसिंग यूनिट में जाती है। यहां फसल के दाने ड्रेसिंग ड्रम और कंक्रीट क्लीयरेंस से रगड़ने पर अलग हो जाते हैं और इसमें लगी छलनी से साफ हो जाते हैं।

मशीन के लाभ एवं विशेषताएं

मशीन करतार, शक्तिमान, कुबोटा और महिंद्रा जैसी कंपनी में उपलब्ध है।

यह मशीन कटाई, थ्रेसिंग, इकट्ठा आधुनिक बाजार करना और तोड़ना, ये चारों काम एक साथ करने में सक्षम है।

यह मशीन समय की बचत के साथ श्रमिकों पर निर्भरता को भी कम करती है।

इस आधुनिक कृषि यंत्र के द्वारा खेत में गिरी हुई फसल की कटाई भी की जा सकती है।

कटाई के बाद पौधों से दानों को अलग करने में भी आसानी होती है।

मशीन में एक शक्तिशाली इंजन होता है, जो शेपर ब्लेड्स और कटिंग चौड़ाई के साथ आता है।

हार्वेस्टर में एक टैंक होता है जो सभी मक्का एकत्र करता है। फिर सभी अनाज को कंटेनर में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

मशीन में लगे स्टोन ट्रैप यूनिट के द्वारा अनाज से कंकड़ एवं मिट्टी के टुकड़े अलग हो जाते हैं।

मशीन 42.5 हॉर्स पावर से 101 हॉर्स पावर के शक्तिशाली इंजन की क्षमता के साथ उपलब्ध है।

मशीन में डीजल टैंक की क्षमता 60 लीटर से 380 लीटर तक दी गई है।

कटर की अधिकतम लंबाई 14 फुट है, जो कई कतारों को एक साथ काट सकती है।

ऊपर दी गयी जानकारी पर अपने विचार और कृषि संबंधित सवाल आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख कर भेज सकते हैं। यदि आपको आज के पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे लाइक करें और अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें। जिससे अधिक से अधिक किसान इस जानकारी का लाभ उठा सकें। साथ ही कृषि संबंधित ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

भारत जीडीपी के संदर्भ में वि‍श्‍व की नवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है । यह अपने भौगोलि‍क आकार के संदर्भ में वि‍श्‍व में सातवां सबसे बड़ा देश है और जनसंख्‍या की दृष्‍टि‍ से दूसरा सबसे बड़ा देश है । हाल के वर्षों में भारत गरीबी और बेरोजगारी से संबंधि‍त मुद्दों के बावजूद वि‍श्‍व में सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक के रूप में उभरा है । महत्‍वपूर्ण समावेशी विकास प्राप्‍त करने की दृष्‍टि‍ से भारत सरकार द्वारा कई गरीबी उन्‍मूलन और रोजगार उत्‍पन्‍न करने वाले कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ।

इति‍हास

ऐति‍हासि‍क रूप से भारत एक बहुत वि‍कसि‍त आर्थिक व्‍यवस्‍था थी जि‍सके वि‍श्‍व के अन्‍य भागों के साथ मजबूत व्‍यापारि‍क संबंध थे । औपनि‍वेशि‍क युग ( 1773-1947 ) के दौरान ब्रि‍टि‍श भारत से सस्‍ती दरों पर कच्‍ची सामग्री खरीदा करते थे और तैयार माल भारतीय बाजारों में सामान्‍य मूल्‍य से कहीं अधि‍क उच्‍चतर कीमत पर बेचा जाता था जि‍सके परि‍णामस्‍वरूप स्रोतों का द्धि‍मार्गी ह्रास होता था । इस अवधि‍ के दौरान वि‍श्‍व की आय में भारत का हि‍स्‍सा 1700 ए डी के 22.3 प्रति‍शत से गि‍रकर 1952 में 3.8 प्रति‍शत रह गया । 1947 में भारत के स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात अर्थव्‍यवस्‍था की पुननि‍र्माण प्रक्रि‍या प्रारंभ हुई । इस उद्देश्‍य से वि‍भि‍न्‍न नीति‍यॉं और योजनाऍं बनाई गयीं और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्‍यम से कार्यान्‍वि‍त की गयी ।

1991 में भारत सरकार ने महत्‍वपूर्ण आर्थिक सुधार प्रस्‍तुत कि‍ए जो इस दृष्‍टि‍ से वृहद प्रयास थे जि‍नमें वि‍देश व्‍यापार उदारीकरण, वि‍त्तीय उदारीकरण, कर सुधार और वि‍देशी नि‍वेश के प्रति‍ आग्रह शामि‍ल था । इन उपायों ने भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को गति‍ देने में मदद की तब से भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था बहुत आगे नि‍कल आई है । सकल स्‍वदेशी उत्‍पाद की औसत वृद्धि दर (फैक्‍टर लागत पर) जो 1951 - 91 के दौरान 4.34 प्रति‍शत थी, 1991-2011 के दौरान 6.24 प्रति‍शत के रूप में बढ़ गयी ।

कृषि‍

कृषि‍ भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ है जो न केवल इसलि‍ए कि‍ इससे देश की अधि‍कांश जनसंख्‍या को खाद्य की आपूर्ति होती है बल्‍कि‍ इसलि‍ए भी भारत की आधी से भी अधि‍क आबादी प्रत्‍यक्ष रूप से जीवि‍का के लि‍ए कृषि‍ पर नि‍र्भर है ।

वि‍भि‍न्‍न नीति‍गत उपायों के द्वारा कृषि‍ उत्‍पादन और उत्‍पादकता में वृद्धि‍ हुई, जि‍सके फलस्‍वरूप एक बड़ी सीमा तक खाद्य सुरक्षा प्राप्‍त हुई । कृषि‍ में वृद्धि‍ ने अन्‍य क्षेत्रों में भी अधि‍कतम रूप से अनुकूल प्रभाव डाला जि‍सके फलस्‍वरूप सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में और अधि‍कांश जनसंख्‍या तक लाभ पहुँचे । वर्ष 2010 - 11 में 241.6 मि‍लि‍यन टन का एक रि‍कार्ड खाद्य उत्‍पादन हुआ, जि‍समें सर्वकालीन उच्‍चतर रूप में गेहूँ, मोटा अनाज और दालों का उत्‍पादन हुआ । कृषि‍ क्षेत्र भारत के जीडीपी का लगभग 22 प्रति‍शत प्रदान करता है ।

उद्योग

औद्योगि‍क क्षेत्र भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लि‍ए महत्‍वपूर्ण है जोकि‍ वि‍भि‍न्‍न सामाजि‍क, आर्थिक उद्देश्‍यों की पूर्ति के लि‍ए आवश्‍यक है जैसे कि‍ ऋण के बोझ को कम करना, वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश आवक (एफडीआई) का संवर्द्धन करना, आत्‍मनि‍र्भर वि‍तरण को बढ़ाना, वर्तमान आर्थिक परि‍दृय को वैवि‍ध्‍यपूर्ण और आधुनि‍क बनाना, क्षेत्रीय वि‍कास का संर्वद्धन, गरीबी उन्‍मूलन, लोगों के जीवन स्‍तर को उठाना आदि‍ हैं ।

स्‍वतंत्रता प्राप्‍ति‍ के पश्‍चात भारत सरकार देश में औद्योगि‍कीकरण के तीव्र संवर्द्धन की दृष्‍टि‍ से वि‍भि‍न्‍न नीति‍गत उपाय करती रही है । इस दि‍शा में प्रमुख कदम के रूप में औद्योगि‍क नीति‍ संकल्‍प की उदघोषणा करना है जो 1948 में पारि‍त हुआ और उसके अनुसार 1956 और 1991 में पारि‍त हुआ । 1991 के आर्थिक सुधार आयात प्रति‍बंधों को हटाना, पहले सार्वजनि‍क क्षेत्रों के लि‍ए आरक्षि‍त, नि‍जी क्षेत्रों में भागेदारी, बाजार सुनि‍श्‍चि‍त मुद्रा वि‍नि‍मय दरों की उदारीकृत शर्तें ( एफडीआई की आवक / जावक हेतु आदि‍ के द्वारा महत्‍वपूर्ण नीति‍गत परि‍वर्तन लाए । इन कदमों ने भारतीय उद्योग को अत्‍यधि‍क अपेक्षि‍त तीव्रता प्रदान की ।

आज औद्योगि‍क क्षेत्र 1991-92 के 22.8 प्रति‍शत से बढ़कर कुल जीडीपी का 26 प्रति‍शत अंशदान करता है ।

सेवाऍं

आर्थिक उदारीकरण सेवा उद्योग की एक तीव्र बढ़ोतरी के रूप में उभरा है और भारत वर्तमान समय में कृषि‍ आधरि‍त अर्थव्‍यवस्‍था से ज्ञान आधारि‍त अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में परि‍वर्तन को देख रहा है । आज सेवा क्षेत्र जीडीपी के लगभग 55 प्रति‍शत ( 1991-92 के 44 प्रति‍शत से बढ़कर ) का अंशदान करता है जो कुल रोजगार का लगभग एक ति‍हाई है और भारत के कुल नि‍र्यातों का एक ति‍हाई है

भारतीय आईटी / साफ्टेवयर क्षेत्र ने एक उल्‍लेखनीय वैश्‍वि‍क ब्रांड पहचान प्राप्‍त की है जि‍सके लि‍ए नि‍म्‍नतर लागत, कुशल, शि‍क्षि‍त और धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलनी वाली जनशक्‍ति‍ के एक बड़े पुल की उपलब्‍धता को श्रेय दि‍या जाना चाहि‍ए । अन्‍य संभावना वाली और वर्द्धित सेवाओं में व्‍यवसाय प्रोसि‍स आउटसोर्सिंग, पर्यटन, यात्रा और परि‍वहन, कई व्‍यावसायि‍क सेवाऍं, आधारभूत ढॉंचे से संबंधि‍त सेवाऍं और वि‍त्तीय सेवाऍं शामि‍ल हैं।

बाहय क्षेत्र

1991 से पहले भारत सरकार ने वि‍देश व्‍यापार और वि‍देशी नि‍वेशों पर प्रति‍बंधों के माध्‍यम से वैश्‍वि‍क प्रति‍योगि‍ता से अपने उद्योगों को संरक्षण देने की एक नीति‍ अपनाई थी ।

उदारीकरण के प्रारंभ होने से भारत का बाहय क्षेत्र नाटकीय रूप से परि‍वर्तित हो गया । वि‍देश व्‍यापार उदार और टैरि‍फ एतर आधुनिक बाजार बनाया गया । वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश सहि‍त वि‍देशी संस्‍थागत नि‍वेश कई क्षेत्रों में हाथों - हाथ लि‍ए जा रहे हैं । वि‍त्‍तीय क्षेत्र जैसे बैंकिंग और बीमा का जोरदार उदय हो रहा है । रूपए मूल्‍य अन्‍य मुद्राओं के साथ-साथ जुड़कर बाजार की शक्‍ति‍यों से बड़े रूप में जुड़ रहे हैं ।

आज भारत में 20 बि‍लि‍यन अमरीकी डालर (2010 - 11) का वि‍देशी प्रत्‍यक्ष नि‍वेश हो रहा है । देश की वि‍देशी मुद्रा आरक्षि‍त (फारेक्‍स) 28 अक्‍टूबर, 2011 को 320 बि‍लि‍यन अ.डालर है । ( 31.5.1991 के 1.2 बि‍लि‍यन अ.डालर की तुलना में )

भारत माल के सर्वोच्‍च 20 नि‍र्यातकों में से एक है और 2010 में सर्वोच्‍च 10 सेवा नि‍र्यातकों में से एक है ।

राज्य आयोग और जिला आयोगों के बारे में

महात्मा गांधी के ऐतिहासिक शब्द जहां उन्होंने उपभोक्ता को हमारे विकासात्मक प्रयासों के केंद्र बिंदु के रूप में इंगित किया कि उपभोक्ता सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है और संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने भी 1962 में अमेरिकी कांग्रेस को इस बारे में सूचित किया था। उपभोक्ताओं के अधिकार और कहा कि “उपभोक्ता, परिभाषा के अनुसार हम सभी को शामिल करें।” लेकिन उपभोक्ताओं की राय अक्सर नहीं सुनी जाती है। उन्होंने चार बुनियादी उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा की, अर्थात्: –

सुरक्षा का अधिकार
सूचना का अधिकार

पसंद का अधिकार, और
प्रतिनिधित्व का अधिकार

इसके बाद, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को 24.12.1986 को अधिनियमित किया गया था, हालांकि, आधुनिक बाजार के साथ-साथ ई-व्यापार बाजार को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के साथ निरस्त कर दिया है। उपभोक्ताओं के पक्ष में कई नई विशेषताएं, जो भारतीय संदर्भ में उपभोक्ताओं के हितों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक नवाचार है और उस उद्देश्य के लिए उपभोक्ता विवादों और संबंधित मामलों के निपटान के लिए उपभोक्ता न्यायालयों की स्थापना के लिए प्रावधान करना है। इसके साथ। यह सामाजिक-आर्थिक कानून के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जिसके दो उद्देश्य हैं, पहला, उपभोक्ताओं को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना और दूसरा, उनकी शिकायतों का त्वरित, सस्ता और न्यायपूर्ण समाधान प्रदान करना। इस अधिनियम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता त्रि-स्तरीय अर्ध-न्यायिक तंत्र की स्थापना का प्रावधान है। जिला स्तर पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (संक्षेप में ‘जिला आयोग’), राज्य स्तर पर राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (संक्षेप में ‘राज्य आयोग’) और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (संक्षेप में ‘राष्ट्रीय आयोग’) राष्ट्रीय/केंद्रीय स्तर।
नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (2019 का 35) प्रभावी हुआ। 20.07.2020 जिसके द्वारा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम का नाम बदलकर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कर दिया गया है और उन शिकायतों पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र है, जहां भुगतान के रूप में भुगतान की गई सेवाओं के सामान का मूल्य रुपये से अधिक नहीं है। पचास लाख। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पास उन शिकायतों पर विचार करने का अधिकार होगा, जहां भुगतान की गई सेवाओं के सामान का मूल्य पचास लाख रुपये से अधिक है, लेकिन रुपये से अधिक नहीं है। दो करोड़ रुपये और माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के पास उन शिकायतों पर विचार करने का अधिकार क्षेत्र होगा, जहां भुगतान की गई सेवाओं के सामान का मूल्य दो करोड़ रुपये से अधिक है।

हरियाणा सरकार राज्य के उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा पर बहुत जोर देती है और राज्य के सभी जिलों में निवारण तंत्र के निर्माण में अग्रणी रही है। प्रारंभ में वर्ष 1989 में, अंबाला और हिसार में दो जिला उपभोक्ता विवाद निवारण मंचों के साथ चंडीगढ़ में हरियाणा राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की स्थापना की गई थी। वर्तमान में राज्य आयोग 13.06.2006 से बेज़ नंबर 3-6, सेक्टर 4, पंचकूला में अपने स्वयं के भवन में कार्य कर रहा है। इसके बाद वर्ष 1993 से 2010 के बीच समय-समय पर शेष 19 जिलों में 19 और जिला उपभोक्ता विवाद निवारण मंच स्थापित किए गए। वर्तमान में, हरियाणा राज्य के सभी जिलों में 21 जिला फोरम कार्यरत हैं।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और amp; मंत्रालय द्वारा व्यापक प्रचार के परिणामस्वरूप हरियाणा राज्य के लोग अपने उपभोक्ता अधिकारों के बारे में अधिक से अधिक जागरूक हो गए हैं; इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ प्रिंट मीडिया के माध्यम से ‘जागो ग्राहक जागो’ के रूप में जाना जाने वाला सार्वजनिक वितरण और राज्य सरकार द्वारा विभिन्न अवसरों पर शिविर, सेमिनार / कार्यशालाएं आधुनिक बाजार और प्रदर्शनियां आदि आयोजित करके और बच्चों को उपभोक्ता के अधिकारों के बारे में शिक्षित करने और संगठित करने के लिए युवाओं को उनके अधिकारों के संरक्षण में उपभोक्ता की भूमिका के बारे में ज्ञान प्रदान करने और देश में उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत करने के लिए उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की भावना पैदा करके, सात जिलों में 135 उपभोक्ता क्लब यानी नारनौल में 10, हिसार में 13 सिरसा में 15, जींद में 12, गुड़गांव में 42, मेवात में 14 और रोहतक में 29 को स्थापित किया गया है. उपभोक्ता क्लबों की योजना 2002 में शुरू की गई थी जिसके अनुसार सरकार से मान्यता प्राप्त बोर्ड / विश्वविद्यालय से संबद्ध प्रत्येक स्कूल / कॉलेज में एक उपभोक्ता क्लब स्थापित किया जा सकता है, इसी तरह अधिक स्वैच्छिक संगठनों को बढ़ावा देने और स्थापित करने की आवश्यकता है जो उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ावा दे सकें। इसके बावजूद स्थानीय निकायों और नगर पालिकाओं, पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों, महिला मंडलों और अन्य स्वैच्छिक संगठनों को शामिल करके उपभोक्ता जागरूकता समारोह आयोजित किए जाते हैं। उपभोक्ताओं के बीच इस बड़े पैमाने पर जागरूकता के कारण उपभोक्ता मामलों की संस्था कई गुना बढ़ गई है। हरियाणा राज्य में राज्य आयोग और जिला फोरम उपभोक्ता मामलों के शीघ्र निपटान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।

गुड़गांव सेक्टर 57 संपत्ति बाजार: एक सिंहावलोकन

गुड़गांव सेक्टर 57 अपनी शहरी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें करीब 70% आबादी हिंदी और अंग्रेजी बोलती है। गुड़गांव सेक्टर 57 अचल संपत्ति तेजी से विकसित हो रहा है, नए आवासीय क्षेत्रों के साथ, जो अन्य क्षेत्रों से इस स्थान पर जाने वाले लोगों के लिए कई विकल्प उपलब्ध कराते हैं। यहां, लक्जरी और जेब के अनुकूल विकल्प दोनों उपलब्ध हैं। सेक्टर 57 एक नियोजित क्षेत्र है और सभी आवश्यक चीजें हैं जो एक आधुनिक शहर में मौजूद हैं।

--> --> --> --> --> (function (w, d) < for (var i = 0, j = d.getElementsByTagName("ins"), k = j[i]; i

Polls

  • Property Tax in Delhi
  • Value of Property
  • BBMP Property Tax
  • Property Tax in Mumbai
  • PCMC Property Tax
  • Staircase Vastu
  • Vastu for Main Door
  • Vastu Shastra for Temple in Home
  • Vastu for North Facing House
  • Kitchen Vastu
  • Bhu Naksha UP
  • Bhu Naksha Rajasthan
  • Bhu Naksha Jharkhand
  • Bhu Naksha Maharashtra
  • Bhu Naksha CG
  • Griha Pravesh Muhurat
  • IGRS UP
  • IGRS AP
  • Delhi Circle Rates
  • IGRS Telangana
  • Square Meter to Square Feet
  • Hectare to Acre
  • Square Feet to Cent
  • Bigha to Acre
  • Square Meter to Cent
  • Stamp Duty in Maharashtra
  • Stamp Duty in Gujarat
  • Stamp Duty in Rajasthan
  • Stamp Duty in Delhi
  • Stamp Duty in UP

These articles, the information therein and their other contents are for information purposes only. All views and/or recommendations are those of the concerned author personally and made purely for information purposes. Nothing contained in the articles should be construed as business, legal, tax, accounting, investment or other advice or as an advertisement or promotion of any project or developer or locality. Housing.com does not offer any such advice. No warranties, guarantees, promises and/or representations of any kind, express or implied, are given as to (a) the nature, standard, quality, reliability, accuracy or otherwise of the information and views provided in (and other contents of) the articles or (b) the suitability, applicability or otherwise of such information, views, or other contents for any person’s circumstances.

Housing.com shall not be liable in any manner (whether in law, contract, tort, by negligence, products liability or otherwise) for any losses, injury or damage (whether direct or indirect, special, incidental or consequential) suffered by such person as a result of anyone applying the information (or any other contents) in these articles or making any investment decision on the basis of such information (or any such contents), or otherwise. The users should exercise due caution and/or seek independent advice before they make any decision or take any action on the basis of such information or other contents.

कासिम बाजार

बर्मा के प्रति ब्रिटिश नीति क्या थीःप्रथम आंग्ल-बर्मी युद्ध

19 वी. शता. के आरंभ में कंपनी रांज्य की पूर्वी सीमा चटगाँव से लेकर उत्तर में पहाङियों तक तथा बंगाल…

डच(डेनिस) ईस्ट इंडिया कंपनी

अन्य संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य- फ्रांसीसी भारत कब आयेयूरोपीय वाणिज्यिक कंपनी पुर्तगालीअंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब की 1602…

अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब की

अंग्रेज- उन यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों में जिन्होंने भारत में आकर अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ आरंभ की उनमें अंग्रेज सर्वाधिक सफल रहे।…

रेटिंग: 4.95
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 165
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *